UPSC परीक्षा में पहली बार ‘Face Scan’ की एंट्री! 5.49 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, अब नकल करना होगा लगभग नामुमकिन
2072 केंद्रों पर चला हाईटेक निगरानी सिस्टम, चेहरा मिलान तकनीक ने बदल दी देश की सबसे बड़ी परीक्षा की तस्वीर
अनन्य सोच। देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 इस बार सिर्फ अभ्यर्थियों की तैयारी ही नहीं, बल्कि हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा में रही। संघ लोक सेवा आयोग यानी Union Public Service Commission ने पहली बार परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक लागू कर परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। दावा किया जा रहा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा फेस ऑथेंटिकेशन अभियान रहा, जिसने फर्जी अभ्यर्थियों और नकल माफियाओं की राह लगभग बंद कर दी।
देशभर के 83 शहरों में बनाए गए 2,072 परीक्षा केंद्रों पर रविवार को सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा आयोजित की गई। इस बार कुल 8.19 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से करीब 5.49 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। यानी लगभग 67 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रही।
पहली बार हुआ लाइव फेस मैचिंग सिस्टम
यूपीएससी अध्यक्ष Ajay Kumar ने परीक्षा के सफल संचालन पर संतोष जताते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन द्वारा विकसित स्वदेशी फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम सभी केंद्रों पर सफलतापूर्वक लागू किया गया। उन्होंने इसे परीक्षा की निष्पक्षता मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
बताया गया कि परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल सिग्नल जैमर, प्रशिक्षित सुरक्षा बल, मेडिकल सहायता, बिजली बैकअप और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। कई राज्यों में गर्मी और मौसम को देखते हुए छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र और पीने के पानी की विशेष व्यवस्था की गई।
दिल्ली सबसे बड़ा केंद्र, कारगिल सबसे छोटा
दिल्ली में सबसे ज्यादा 70,885 अभ्यर्थियों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया, जबकि हैदराबाद और पटना भी बड़े केंद्रों में शामिल रहे। दूसरी ओर कारगिल में केवल 98 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया।
इस बार यूपीएससी ने भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ को नए परीक्षा केंद्र के रूप में जोड़ा है। साथ ही पहली बार परीक्षा समाप्त होते ही अस्थायी उत्तर कुंजी जारी करने का फैसला भी लिया गया है। अभ्यर्थी 31 मई तक अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यूपीएससी की यह नई तकनीकी पहल भविष्य में देश की अन्य बड़ी परीक्षाओं के लिए भी मॉडल बन सकती है।