गांव की मिट्टी से बॉलीवुड तक! गिरधर स्वामी ने ऐसे बदली 75 से ज्यादा फिल्मों की तकदीर
राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक का सफर आसान नहीं होता, लेकिन गिरधर स्वामी ने यह कर दिखाया। "3 इडियट्स" से शुरू हुई उनकी कास्टिंग जर्नी आज 75 से ज्यादा फिल्मों तक पहुंच चुकी है। आखिर क्या है उनकी सफलता का राज? जानने के लिए पढ़ें पूरी कहानी।
अनन्य सोच । राजस्थान के चूरू जिले की सुजानगढ़ तहसील के छोटे से गांव अबासर से निकलकर मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन साफ लक्ष्य, लगातार मेहनत और खुद पर भरोसे ने गिरधर स्वामी को कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर एक अलग मुकाम दिलाया। जयपुर के रंगमंच से शुरू हुई उनकी कलात्मक यात्रा मुंबई पहुंची और वर्ष 2009 में "3 इडियट्स" जैसी बड़ी फिल्म से उन्हें बड़े पर्दे की दुनिया में एंट्री मिली। 18 साल से ज्यादा के करियर में वे अब तक 75 से ज्यादा फीचर फिल्मों, 10 से ज्यादा शॉर्ट फिल्मों और 15 से ज्यादा म्यूजिक वीडियो की कास्टिंग से जुड़ चुके हैं।
अपने सफर को याद करते हुए गिरधर स्वामी बताते हैं कि शुरुआती तीन-चार साल काफी संघर्षभरे रहे, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा साफ रहा। धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि फिल्म इंडस्ट्री में किस तरह काम करना है और किन लोगों से जुड़ना जरूरी है। उनका मानना है कि अगर फोकस साफ हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो रास्ते खुद-ब-खुद बनते चले जाते हैं।
जयपुर के रंगमंच ने उन्हें सबसे बड़ी सीख दी कि जो भी काम करो, पूरे मन से करो। "3 इडियट्स" से जुड़ने के अनुभव को याद करते हुए वे कहते हैं कि उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित होगी।
नए कलाकारों में क्या देखते हैं, इस सवाल पर गिरधर स्वामी कहते हैं कि सबसे पहले वे कलाकार का फोकस और गोल देखते हैं, फिर उसकी पर्सनैलिटी और उसके बाद एक्टिंग स्किल्स। राजस्थान के युवाओं के लिए उनका सीधा संदेश है कि अपना लक्ष्य साफ रखें, लगातार मेहनत करें और सपना कभी न छोड़ें।
अपने करियर में गिरधर स्वामी "राउडी राठौड़", "वजीर", "सनम तेरी कसम", "अंधाधुन" और "कुली नंबर 1" जैसी कई हिट फिल्मों की कास्टिंग से जुड़ चुके हैं और हर्षवर्धन राणे, श्रद्धा दास, गौतम गुलाटी सहित कई कलाकारों को मौका दे चुके हैं।