जब मिट्टी में दिखी खजुराहो की आत्मा: डॉ. चन्द्रशेखर सेन की टेराकोटा मिरर आर्ट ने रचा अद्भुत दृश्य संसार

मोलैला परंपरा और समकालीन कला का अनोखा संगम, 150 से अधिक टेराकोटा आकृतियों से सजी कलाकृति बनी आकर्षण का केंद्र

May 13, 2026 - 12:32
 0
जब मिट्टी में दिखी खजुराहो की आत्मा: डॉ. चन्द्रशेखर सेन की टेराकोटा मिरर आर्ट ने रचा अद्भुत दृश्य संसार

अनन्य सोच। भारतीय लोक कला और आधुनिक विज़ुअल एक्सप्रेशन का दुर्लभ संगम एक बार फिर सामने आया है। वरिष्ठ टेराकोटा एवं विज़ुअल आर्टिस्ट Dr. Chandrashekhar Sen ने अपनी नई “टेराकोटा मिरर आर्टवर्क” के माध्यम से ऐसी कलात्मक दुनिया रची है, जो दर्शकों को परंपरा, मिथक और आधुनिक संवेदनाओं के बीच एक अनूठी यात्रा पर ले जाती है।

राजस्थान की प्रसिद्ध मोलैला टेराकोटा परंपरा से प्रेरित इस विशेष कलाकृति में खजुराहो की मूर्ति-शिल्प शैली की जीवंतता, भाव-भंगिमा और ऊर्जा को आधुनिक कला दृष्टि के साथ प्रस्तुत किया गया है। सर्कुलर मिरर कॉम्पोज़िशन में तैयार यह कला न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहराई को भी अभिव्यक्त करती है।

150 से अधिक टेराकोटा फिगर्स ने रचा ‘दूसरी दुनिया’ का एहसास

इस अनूठे मिरर वर्क में 150 से अधिक टेराकोटा आकृतियों को अत्यंत सूक्ष्मता और संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया है। प्रत्येक आकृति अपनी अलग कहानी और भाव लेकर सामने आती है। पूरा कॉम्पोज़िशन ऐसा प्रतीत होता है मानो ये सभी आकृतियाँ किसी रहस्यमयी लोक में तैर रही हों।

कलाकृति दर्शकों को केवल दृश्य आनंद ही नहीं देती, बल्कि उन्हें भारतीय मिथकीय स्मृतियों और सांस्कृतिक चेतना से भी जोड़ती है। यही वजह है कि यह आर्टवर्क पारंपरिक शिल्प से आगे बढ़कर एक गहरे कलात्मक संवाद का माध्यम बन जाता है।

100 प्रतिशत प्राकृतिक टेराकोटा से निर्मित, पर्यावरण संरक्षण का संदेश

डॉ. सेन की इस कलाकृति की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह 100 प्रतिशत प्राकृतिक टेराकोटा से तैयार की गई है। पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता इस रचना में स्पष्ट दिखाई देती है।

वे अपनी कला प्रक्रिया में हमेशा ऐसी तकनीकों और सामग्रियों का उपयोग करते हैं, जो प्रकृति को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुँचाएँ। यही कारण है कि उनकी कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी बन जाती है।

भारतीय शिल्प की जड़ों से जुड़ी आधुनिक कला की नई पहचान

यह टेराकोटा मिरर आर्टवर्क इस बात का सशक्त उदाहरण है कि पारंपरिक भारतीय शिल्प में समकालीन कला के नए आयाम किस तरह विकसित किए जा सकते हैं। मोलैला की लोक परंपरा और खजुराहो की शास्त्रीय मूर्तिकला को आधुनिक प्रस्तुति में ढालकर डॉ. चन्द्रशेखर सेन ने भारतीय कला को एक नया विज़ुअल आयाम दिया है। यह कलाकृति भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों, शिल्प की ताकत और आधुनिक कला की प्रयोगशीलता को प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है।