“नाद से शुरू होती है सृष्टि”—पं. सलिल भट्ट ने संगीत और सनातन के गूढ़ रहस्यों को किया उजागर

अभिनेता सुदेश बेरी के साथ खास बातचीत में सात्विक वीणा वादक ने बताया—संगीत, साधना और सनातन एक ही ऊर्जा के रूप

“नाद से शुरू होती है सृष्टि”—पं. सलिल भट्ट ने संगीत और सनातन के गूढ़ रहस्यों को किया उजागर

अनन्य सोच। 

प्रश्न 1: संगीत की शुरुआत कहां से मानी जाए?
उत्तर: पं. सलिल भट्ट के अनुसार, “शब्द से पहले स्वर था और स्वर से पहले नाद।” उन्होंने बताया कि नाद ही सृष्टि की मूल ध्वनि है, जिसे ‘ब्रह्मनाद’ कहा जाता है। यही सनातन का आधार है। उनके अनुसार संगीत केवल कला नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्वरूप है, जो हर जीव में विद्यमान है।

प्रश्न 2: क्या हर व्यक्ति में संगीत छिपा होता है?

उत्तर: इस सवाल पर पं. भट्ट ने स्पष्ट कहा कि हर व्यक्ति के भीतर स्वर और ताल पहले से मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने और साधने की है। उन्होंने कहा, “हम अपनी क्षमताओं को अक्सर अनदेखा कर देते हैं, जबकि साधना के माध्यम से उन्हें जागृत किया जा सकता है।” उन्होंने युवाओं को अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसे निखारने की प्रेरणा दी।

प्रश्न 3: आपकी साधना की प्रेरणा और आधार क्या है?

उत्तर: पं. सलिल भट्ट ने अपनी साधना का पूरा श्रेय अपने गुरु और पिता पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट को दिया। उन्होंने कहा, “मैं जो भी हूं, अपने गुरु के आशीर्वाद से हूं।” गुरु-शिष्य परंपरा को उन्होंने भारतीय संस्कृति की सबसे मजबूत नींव बताया और इसे आगे बढ़ाना अपना कर्तव्य बताया।

प्रश्न 4: ‘सात्विक वीणा’ का निर्माण कैसे हुआ?

उत्तर: उन्होंने बताया कि उनके जीवन में आध्यात्मिकता का गहरा संबंध है। उनके पुत्र ‘सात्विक’ का जन्म महाशिवरात्रि के दिन हुआ, जिसे उन्होंने एक दिव्य संकेत माना। इसी प्रेरणा से ‘सात्विक वीणा’ का निर्माण हुआ। यह केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति का प्रतीक है।

प्रश्न 5: आपके जीवन में आध्यात्मिकता की भूमिका क्या है?

उत्तर: पं. भट्ट ने बताया कि उनके जीवन का हर पहलू सनातन और आध्यात्म से जुड़ा हुआ है। उनकी पुत्री ‘सत्कृति’ का नाम भी भगवान शिव के सहस्त्र नामों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि उनके लिए संगीत और आध्यात्म अलग नहीं, बल्कि एक ही धारा के दो रूप हैं।

प्रश्न 6: महाशिवरात्रि और शिव-पार्वती विवाह को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: इस पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक है। शिव और पार्वती का मिलन ऊर्जा और शक्ति के संतुलन को दर्शाता है। यह घटना सृष्टि के गहरे रहस्यों को समझने का माध्यम है।

प्रश्न 7: आपके जीवन का वर्तमान लक्ष्य क्या है?

उत्तर: पं. सलिल भट्ट ने कहा कि उनका जीवन अब पूरी तरह सनातन की साधना को समर्पित है। “जितना मैं इस मार्ग पर आगे बढ़ता हूं, उतना ही महसूस होता है कि अभी बहुत कुछ जानना बाकी है।” उन्होंने इसे एक अनंत यात्रा बताया। 

गाजियाबाद के धर्मसूत्र स्टूडियो में अभिनेता सुदेश बेरी द्वारा लिया गया यह विशेष इंटरव्यू संगीत, आध्यात्म और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यह बातचीत न केवल संगीत प्रेमियों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन के गहरे अर्थ को समझना चाहते हैं।