“जहां नौकरी होनी थी वहां शादी, जहां शादी होनी थी वहां नौकरी” — ‘रीत विपरीत’ ने हंसी के बीच खोल दिए समाज के सबसे बड़े राज
दहेज, नारी शिक्षा और रूढ़िवादी सोच पर करारा व्यंग्य, रवींद्र मंच पर दर्शकों ने खूब सराहा हास्य नाटक
अनन्य सोच। रवींद्र मंच पर रविवार शाम मंचित हास्य नाटक ‘रीत विपरीत’ ने दर्शकों को हंसी के ठहाकों के साथ समाज की कई कड़वी सच्चाइयों से रूबरू कराया। कला, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग राजस्थान सरकार और रस रंग मंच संस्था के सहयोग से आयोजित इस नाटक का निर्देशन एवं नाट्य रूपांतरण हिमांशु झांकल ने किया, जबकि इसकी मूल रचना प्रसिद्ध लेखक दया प्रकाश सिन्हा द्वारा लिखी गई है।
कहानी में छिपा था समाज का सबसे बड़ा सवाल
नाटक की कहानी ऐसे परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां परंपरा और आधुनिक सोच के बीच टकराव दिखाई देता है। रामनरेश का पुत्र मनोज नौकरी के इंटरव्यू के बहाने घर से बाहर जाता है, लेकिन लौटता है शादी करके। दूसरी तरफ भरोसे लाल, रामनरेश की बेटी पूजा को विवाह के लिए देखने आता है, लेकिन ज्यादा दहेज मिलने पर कहीं और रिश्ता तय कर देता है।
कहानी में असली मोड़ तब आता है, जब पूजा के नौकरी में चयन की खबर सामने आती है। यहीं से नाटक यह सवाल छोड़ता है कि आखिर समाज में लड़की की पहचान उसकी शिक्षा और क्षमता से होगी या दहेज से?
हास्य के जरिए दिया बड़ा सामाजिक संदेश
नाटक में हास्य और व्यंग्य का ऐसा संतुलन देखने को मिला, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। “जहां नौकरी होनी थी वहां शादी और जहां शादी होनी थी वहां नौकरी” जैसी परिस्थितियों ने पूरे सभागार को ठहाकों से भर दिया।
लेकिन हंसी के पीछे छिपा संदेश कहीं ज्यादा गहरा था। नाटक ने दहेज लोभ, नारी शिक्षा के प्रति संकीर्ण सोच और विवाह को लेन-देन का माध्यम बनाने जैसी सामाजिक कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया। प्रस्तुति ने यह भी संदेश दिया कि अगर बदलाव समाज के हित में हो, तो परंपराओं से आगे बढ़ने में संकोच नहीं होना चाहिए।
नवोदित कलाकारों ने जीता दर्शकों का दिल
नाटक में देवांग सैनी, काम्या गोयल, पूजा यादव, नरेंद्र जानी, राज केतन, वर्षा भाटी, रति महर्षि, लक्ष्य शर्मा, हितेश, कान्हा, सरोज कनवाडिया और यश प्रताप सिंह सहित दस से अधिक युवा कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय किया। इन कलाकारों को 45 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के माध्यम से तैयार किया गया था।
दर्शकों ने कलाकारों की कॉमिक टाइमिंग, संवाद अदायगी और मंच प्रस्तुति की जमकर सराहना की। कार्यक्रम के अंत में निर्देशक हिमांशु झांकल ने कहा कि थिएटर केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है।