44 साल बाद भी जीवंत है गुरुदेव की विरासत: रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रतिमा के स्थापना दिवस पर मूर्तिकार डॉ. सुमहेन्द्र को भावभीनी श्रद्धांजलि
जयपुर के सांस्कृतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाने वाली गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रतिमा के स्थापना दिवस पर कला जगत ने न केवल गुरुदेव को नमन किया, बल्कि इस अद्भुत कृति के शिल्पकार वरिष्ठ मूर्तिकार एवं चित्रकार डॉ. सुमहेन्द्र के योगदान को भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कला, संस्कृति और साहित्य जगत की अनेक हस्तियां शामिल हुईं।
अनन्य सोच। कलावृत्त एवं त्रिमूर्ति संस्था के संयुक्त तत्वावधान में वर्ष 1982 में स्थापित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रतिमा के स्थापना दिवस पर मंगलवार को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रतिमा का निर्माण प्रख्यात मूर्तिकार एवं चित्रकार डॉ. सुमहेन्द्र ने किया था, जबकि इसका लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर द्वारा किया गया था।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों, साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर गुरुदेव को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा राष्ट्रगान के साथ उनकी स्मृतियों को नमन किया। कलावृत्त के अध्यक्ष संदीप सुमहेन्द्र ने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि जयपुर की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का प्रतीक है।
इस अवसर पर कलावृत्त द्वारा दो दिवसीय Landscape Art Camp का भी आयोजन किया गया। शिविर में संत कुमार, हेमल कांकरवाल, रश्मि राजावत, कृतिका बजाज और हर्ष शर्मा सहित राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थियों ने गुरुदेव की प्रतिमा एवं रवीन्द्र मंच के On The Spot Landscape Paintings तैयार किए। कलाकारों की रचनाओं ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम में डॉ. सुमहेन्द्र की धर्मपत्नी सुमन शर्मा, बीजेपी राजस्थान के सांस्कृतिक एवं पर्यटन प्रकोष्ठ के पदाधिकारी तथा अनेक कला प्रेमी मौजूद रहे। मूर्ति निर्माण में सहयोगी रहे ओम प्रकाश मीणा की उपस्थिति भी विशेष आकर्षण रही।
कलावृत्त के प्रवक्ता दिगंत शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए संस्था के आगामी सांस्कृतिक और कला कार्यक्रमों की जानकारी दी। आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महान व्यक्तित्वों की विरासत और उन्हें अमर बनाने वाले कलाकार समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होते जाते हैं।