अखंड सौभाग्य की आराधना: जयपुर में शाही ठाठ के साथ सजी गणगौर महोत्सव की अनुपम छटा

अखंड सौभाग्य की आराधना: जयपुर में शाही ठाठ के साथ सजी गणगौर महोत्सव की अनुपम छटा

Ananya soch: Rajasthan Festival

अनन्य सोच। Suhagin Festival: छोटी काशी के नाम से विख्यात जयपुर में सुहाग पर्व गणगौर चैत्र शुक्ल तृतीया को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक वैभव के साथ मनाया गया। (Gangaur Jaipur)  सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखकर ईसर-गणगौर का विधिवत पूजन किया, वहीं कुंवारी कन्याओं ने योग्य वर की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की।घरों और मंदिरों में गूंजा भक्ति का स्वर

दिनभर शहर के मंदिरों और घरों में गणगौर माता का पूजन-अर्चन किया गया। महिलाओं ने घेवर, शक्करपारे और गुणे का भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर परंपरा अनुसार 16 सुहागिनों को भोजन करवाकर उद्यापन किया गया, वहीं सास को बयाना देकर आशीर्वाद लिया गया।

गायत्री चेतना केंद्र, मुरलीपुरा सहित विभिन्न स्थानों पर सामूहिक पूजन का आयोजन हुआ, जहां नवविवाहिताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

गीतों के साथ भावुक विदाई और विसर्जन

शाम होते ही महिलाओं ने सिर पर गणगौर को विराजमान कर सवारी निकाली जाएगी। लोकगीतों और जयकारों के बीच तालकटोरा, जलमहल, आमेर मावठा और चंदलाई बांध सहित विभिन्न जल स्त्रोतों में गणगौर का विसर्जन किया गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जल स्त्रोत को गणगौर का ससुराल माना जाता है।

शाही शोभायात्रा ने मोहा जन-मन (Gangaur Shobhayatra) 

जयपुर की विश्वप्रसिद्ध गणगौर शोभायात्रा ने इस बार भव्यता के नए आयाम स्थापित किए। 210 लोक कलाकारों के समूह और 32 पारंपरिक लवाजमों ने सवारी को अद्भुत बना दिया। सिटी पैलेस से प्रारंभ हुई शाही सवारी त्रिपोलिया गेट से होती हुई चौड़ा रास्ता पहुंची, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और पूर्व राजपरिवार की महिलाओं ने विधिवत पूजन किया। पारंपरिक वेशभूषा, झांकियों और वाद्ययंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

शाही श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र (Indian Traditions) 

गणगौर माता का दिव्य श्रृंगार इस बार विशेष आकर्षण रहा। 1.5 किलो मुकुट, 900 ग्राम चंपाकली हार, मांग टीका, बाजूबंद और अन्य रत्नजड़ित आभूषणों ने माता के स्वरूप को अद्भुत आभा प्रदान की।लोक संस्कृति की जीवंत झलक

पूरे आयोजन में राजस्थान की समृद्ध लोक कला, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। पुष्पवर्षा और मंगल गीतों के बीच गणगौर माता की सवारी का स्वागत किया गया।