RIC में कलाकार प्रमोद आर्य ने रंगों से रची भावनाओं की अनकही दुनिया
लोक एवं समकालीन कला शिविर के चौथे दिन दर्शकों ने देखा ‘Live Art Creation’, हर चित्र ने सुनाई संस्कृति, स्मृतियों और प्रकृति की कहानी
अनन्य सोच। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में आयोजित पांच दिवसीय लोक एवं समकालीन कला शिविर का तीसरा दिन कला प्रेमियों के लिए यादगार बन गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरा परिसर मानो एक जीवंत Art Gallery में तब्दील हो गया। रंगों, रेखाओं और कल्पनाओं के संगम ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विविधता से रूबरू कराया।
इस दौरान वरिष्ठ कलाकार प्रमोद आर्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने न केवल अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन किया, बल्कि दर्शकों के सामने अपनी Creative Process को भी साझा किया। उनकी कला में अमूर्तता, प्रकृति और Landscape Art का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया, जिसने कला प्रेमियों को लंबे समय तक अपने सामने रुकने पर मजबूर कर दिया।
प्रमोद आर्य भारतीय Contemporary Art जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट, जयपुर से कला शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने दिल्ली आर्ट कॉलेज से स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। अध्यापन के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वर्तमान में चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्ट से जुड़े हुए हैं।
उनकी कलाकृतियों की सबसे बड़ी विशेषता रंगों का प्रभावशाली उपयोग है। उन्होंने अपने कला जीवन की शुरुआत Watercolor Painting से की थी, लेकिन समय के साथ Acrylic Art में अपनी अलग पहचान बनाई। रंगों की परतों के माध्यम से वे स्मृतियों, संवेदनाओं और प्रकृति के विभिन्न रूपों को अभिव्यक्त करते हैं।
शिविर में प्रदर्शित उनकी हालिया रचनाओं में राजस्थान की मिट्टी, उसके उष्ण रंगों और काल्पनिक प्राकृतिक दृश्यों की झलक साफ दिखाई दी। हर कैनवास मानो किसी अनकही कहानी को शब्दों के बिना बयां कर रहा था। दर्शकों ने उनकी रचनाओं को न केवल सराहा बल्कि कला के पीछे छिपे विचारों को भी समझने का प्रयास किया।
लोक एवं समकालीन कला शिविर के आगामी दिनों में भी कई प्रतिष्ठित कलाकार अपनी कला यात्रा और रचनात्मक दृष्टि से दर्शकों को परिचित कराएंगे। ऐसे में यह आयोजन कला प्रेमियों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।