जयपुर की 'मार्मिक' Exhibition में छिपा है चौंकाने वाला संदेश! फूलों से लेकर मिट्टी तक, स्टूडेंट्स ने बना दिया कुदरत का आईना

जयपुर में एक ऐसी Exhibition शुरू हुई है, जिसे देखकर लोग ठिठक जा रहे हैं। यहां रंग सिर्फ रंग नहीं, बल्कि प्रकृति की पुकार बनकर सामने आए हैं।

Jul 22, 2026 - 23:36
Jul 22, 2026 - 23:46
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जयपुर की 'मार्मिक' Exhibition में छिपा है चौंकाने वाला संदेश! फूलों से लेकर मिट्टी तक, स्टूडेंट्स ने बना दिया कुदरत का आईना

अनन्य सोच। राजधानी जयपुर में कला और डिज़ाइन प्रेमियों के लिए एक खास मौका आया है। मानसरोवर स्थित पोद्दार इंस्टिट्यूट के NIFT Global Jaipur परिसर में बुधवार को वार्षिक Design Exhibition "मार्मिक - डिज़ाइन बिफोर वी डिसअपीयर" का शानदार उद्घाटन हुआ। यह पांच दिवसीय Exhibition 26 जुलाई तक शहर के सभी Art-Design Lovers के लिए खुली रहेगी।

उद्घाटन समारोह में Rajeevika (RGAVP) की State Mission Director प्रियंका गोस्वामी, पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा (Retd. IPS), Rajeevika की State Project Manager डॉ. रमणिका कौर, Indian Institute of Interior Design की मानद सचिव Architect अंशुमान शर्मा सहित Chairperson कमला पोद्दार, Director अभिषेक पोद्दार और रोमा पोद्दार मौजूद रहे। खास बात यह रही कि Exhibition में Rajeevika Self-Help Groups के उत्पादों को भी विशेष स्थान दिया गया।

लेकिन इस Exhibition में ऐसा क्या खास है, जो इसे बाकी से अलग बनाता है? दरअसल Fashion और Interior Design के स्टूडेंट्स ने अपनी रचनाओं के जरिए Heritage, Environment और Sustainability जैसे गंभीर विषयों को बेहद रचनात्मक ढंग से पेश किया। इस साल की Theme के जरिए स्टूडेंट्स ने डिज़ाइन को सिर्फ सजावट से आगे बढ़ाकर जीवन का सच्चा आईना बना दिया।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इन डिज़ाइन्स में इस्तेमाल हुए ज्यादातर रंग Natural Sources से लिए गए थे। स्टूडेंट्स ने मेहंदी, हल्दी, जामुन, बेल, अनार, चुकंदर, गुलाब और मंजिष्ठा से रंग तैयार किए, वहीं बांस, केले के रेशे और कैक्टस जैसी सामग्रियों पर भी प्रयोग किए। पारंपरिक इत्र को भी परिधानों में नए अंदाज़ में शामिल किया गया।

Exhibition का सबसे बड़ा Showstopper रहा "आरग्लास इंस्टॉलेशन" — जिसके ऊपरी हिस्से में जीवित पौधे उम्मीद और बचाए जा सकने वाले भविष्य का प्रतीक बने, जबकि निचले हिस्से में मलबा और सूखी टहनियां Environmental Destruction की कहानी बयां कर रही थीं। Pollution, Waste और Climate Change जैसे मुद्दों को भी बड़े ही असरदार ढंग से उठाया गया।