ज्ञान भारतम मिशन में राजस्थान ने रचा इतिहास 16.66 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, देश में राजस्थान बना अग्रणी

May 13, 2026 - 08:15
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ज्ञान भारतम मिशन में राजस्थान ने रचा इतिहास  16.66 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, देश में राजस्थान बना अग्रणी

अनन्य सोच। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत राजस्थान ने पांडुलिपि सर्वेक्षण के क्षेत्र में देशभर में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 16.66 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जो पूरे देश में सर्वाधिक है।

भारतीय ज्ञान परंपरा के अमूल्य ग्रंथों का दस्तावेजीकरण

बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने बताया कि कला एवं संस्कृति विभाग तथा विशेषज्ञों के सहयोग से यह व्यापक सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया। इसके तहत विष्णु पुराण, पद्म पुराण, शिव पुराण, वेद, रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़ी अनेक दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इन अमूल्य धरोहरों के संरक्षण और अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए एशियाटिक सोसाइटी के विशेषज्ञों से भी सहयोग का आग्रह किया है।

जैन ज्ञान भंडार बने आकर्षण का केंद्र

समीक्षा बैठक में बताया गया कि राजस्थान के विभिन्न जैन ज्ञान भंडारों में संरक्षित प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। सर्वेक्षण के दौरान वैदिक दर्शन, ऋचाओं और भारतीय दार्शनिक परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का भी संकलन किया गया।

रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता की विभिन्न भाषाओं एवं लिपियों में उपलब्ध सदियों पुरानी प्रतियां भी इस अभियान का प्रमुख हिस्सा रही हैं।

शोधार्थियों को मिलेगा बड़ा लाभ

मुख्य सचिव ने बताया कि वर्तमान में इन पांडुलिपियों की प्रकृति के अनुसार श्रेणीबद्ध सूची यानी कैटलॉगिंग तैयार की जा रही है। इससे शोधार्थियों, इतिहासकारों और अकादमिक जगत को अध्ययन एवं अनुसंधान में बड़ी सुविधा मिलेगी।

डिजिटलीकरण पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक में कैबिनेट सचिव ने निर्देश दिए कि अगले चरण में विशेष रूप से जैन ग्रंथों और पुराणों की उच्च गुणवत्ता वाली मेटाडेटा स्कैनिंग और डिजिटलीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। इससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।

राजस्थान का यह प्रयास न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित रखने का मजबूत आधार भी बनेगा।