‘जल स्वावलंबी’ राजस्थान की ओर बढ़ते कदम: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल क्रांति का नया अध्याय

‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0’ से गांव-गांव में जल संरक्षण को मिली नई गति 20 हजार गांवों में 5 लाख जल संरचनाओं का लक्ष्य, लाखों परिवारों को राहत तकनीक, जनभागीदारी और योजनाओं के समन्वय से बना प्रभावी मॉडल

‘जल स्वावलंबी’ राजस्थान की ओर बढ़ते कदम: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल क्रांति का नया अध्याय

अनन्य सोच। मरुस्थलीय चुनौतियों से जूझते राजस्थान में जल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0’ राज्य को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहा है। यह अभियान न केवल जल संरक्षण, बल्कि भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का व्यापक मॉडल बनकर उभरा है।

कम वर्षा, अनियमित मानसून और भूजल के अत्यधिक दोहन से जूझ रहे राज्य में वर्षा जल का अधिकतम संचयन इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। इसके तहत एनिकट, चेक डैम, तालाब और जोहड़ों का निर्माण किया जा रहा है, वहीं पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन भी किया जा रहा है। परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार हुआ है और पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है।

लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ता अभियान
बजट 2024-25 में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 11,200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राज्यभर के 20 हजार गांवों में 5 लाख जल संरचनाएं विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले चरण में 5,135 गांवों में 1.16 लाख से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जिन पर करीब 2,500 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। दूसरे चरण में भी तेज़ी से कार्य प्रगति पर है और हजारों परियोजनाएं स्वीकृत होकर क्रियान्वित हो रही हैं।

तकनीक और जनभागीदारी का अनूठा संगम
अभियान की सफलता में ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी और स्थानीय निगरानी समितियों की अहम भूमिका रही है। साथ ही, निजी कंपनियों के सीएसआर सहयोग से संसाधनों का दायरा बढ़ा है। जीआईएस मैपिंग, ड्रोन सर्वे और डिजिटल रिकॉर्डिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्यों की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की गई है।

ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
इस अभियान से न केवल जल संकट कम हुआ है, बल्कि कृषि उत्पादकता में वृद्धि, हरित आवरण का विस्तार और मिट्टी के कटाव में कमी भी देखी गई है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप यह अभियान आने वाले वर्षों में राजस्थान को जल प्रबंधन का आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में अग्रसर है, जहां हर गांव ‘जल स्वावलंबी’ बनकर सतत विकास की मिसाल पेश करेगा।