‘नृत्यति’ में सजी कथक की अनुपम छटा: परंपरा, सौंदर्य और साधना का मंत्रमुग्ध कर देने वाला संगम
विश्व नृत्य दिवस की पूर्व संध्या पर यादगार प्रस्तुति | डॉ. श्वेता गर्ग के निर्देशन में 100 से अधिक छात्राओं ने बिखेरा कला का जादू
अनन्य सोच। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के मिनी ऑडिटोरियम–प्रथम में रविवार शाम ‘नृत्यति’ शीर्षक से आयोजित विशेष नृत्य संध्या ने दर्शकों को शास्त्रीय सौंदर्य और भावनाओं की अद्भुत दुनिया में ले गया। विश्व नृत्य दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. श्वेता गर्ग के निर्देशन में लगभग 100 छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से मंच को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्वेता गर्ग की मनोहारी “गोविंद की वंदना” से हुई, जिसमें रूपक ताल की सात मात्राओं पर आधारित ठाठ, दोहरा, टिपल्ली, चलत और मेरुखंड की परन ने शुद्ध कथक की गरिमा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद विशेष समूह की “कान्हा” प्रस्तुति में गीतू, विशाखा और अंजलि ने राधा-कृष्ण के प्रेम और विरह के भावों को कोमलता से उकेरा। कनिष्ठ समूह द्वारा प्रस्तुत “मल्हार झाम” ने राग मल्हार की वर्षा-रस से भीगी अनुभूति को तराना के माध्यम से खूबसूरती से व्यक्त किया। वहीं, जूनियर समूह की “तेरे रंग” प्रस्तुति ने होली के रंगों और प्रेम के उल्लास को जीवंत कर दर्शकों को आनंदित किया। मध्य वरिष्ठ समूह की “पायलिया” में घुंघरुओं की झंकार के साथ कथक की नज़ाकत, लयकारी और अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। इसके बाद वरिष्ठतम समूह की सूफियाना प्रस्तुति “इश्क जलाकर कारवां” ने प्रेम, विरह और आध्यात्मिकता के भावों को गहराई से अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में शुद्ध कथक की प्रस्तुति में झपताल की जटिलता और सधे हुए पदचालन ने दर्शकों को प्रभावित किया। विशेष समूह की “इठलाती बलखाती” ने सावन की चंचलता और मादकता को चतुरंग शैली में प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया। वहीं, शुरुआती कलाकारों की “कृष्ण” प्रस्तुति में तीनताल के कवित्तों के माध्यम से भक्ति रस का सहज और सुंदर चित्रण देखने को मिला।
कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ समूह की ऊर्जावान “ब्रेथलेस” प्रस्तुति से हुआ, जिसमें तीव्र लय और निरंतर गतियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
पूरे आयोजन में डॉ. श्वेता गर्ग की सृजनात्मक परिकल्पना और विद्यार्थियों की साधना ने यह सिद्ध किया कि कथक की परंपरा नई पीढ़ी में मजबूती से आगे बढ़ रही है। ‘नृत्यति’ ने विश्व नृत्य दिवस की पूर्व संध्या को अविस्मरणीय बना दिया।