राजस्थान हाईकोर्ट के तीन बड़े फैसले: जेडीए को झटका, कोविड में मौत पर मुआवजे पर जवाब तलब और दिव्यांग छात्रा को MBBS में प्रवेश का रास्ता साफ

राजस्थान हाईकोर्ट के तीन बड़े फैसले: जेडीए को झटका, कोविड में मौत पर मुआवजे पर जवाब तलब और दिव्यांग छात्रा को MBBS में प्रवेश का रास्ता साफ

Ananya soch: Rajasthan Court Latest News

अनन्य सोच। जयपुर से आई तीन अहम न्यायिक खबरों ने शनिवार को पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। (Rajasthan High Court News) Rajasthan High Court ने एक ही दिन में तीन ऐसे फैसले सुनाए, जिनसे न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र पर असर पड़ेगा, बल्कि आम लोगों और छात्रों को भी बड़ी राहत मिलेगी। 9000 वर्ग मीटर जमीन के मामले में जेडीए की अपील खारिज होने से जहां प्रॉपर्टी विवाद में बड़ा मोड़ आया है, वहीं कोविड में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाली सरकारी कर्मचारी के परिवार को मुआवजे पर सरकार से जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही दिव्यांग छात्रा के MBBS में प्रवेश को लेकर भी अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।

9000 वर्ग मीटर जमीन का मामला: जेडीए की अपील खारिज, आवंटन का रास्ता साफ

(Jaipur JDA Case) टोंक रोड स्थित एयरपोर्ट प्लाजा स्कीम के पास 9000 वर्ग मीटर जमीन से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को बड़ा झटका दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने जेडीए की विशेष अपील खारिज करते हुए एकलपीठ के 6 अगस्त 2009 के आदेश को बरकरार रखा।

अदालत ने साफ कहा कि राज्य सरकार अपने ही निर्णयों से पीछे नहीं हट सकती, खासकर तब जब संबंधित पक्ष उन निर्णयों पर भरोसा कर अपने मुकदमे वापस ले चुका हो। कोर्ट ने जेडीए को निर्देश दिए कि वह राज्य सरकार के 12 और 19 मई 2003 के आदेशों को तुरंत लागू करते हुए साई दर्शन होटल्स एंड मोटल्स के पक्ष में 9000 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन पत्र जारी करे।

खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि कई वर्षों से इस जमीन का उपयोग जेडीए कर रहा है, जबकि मूल मालिकों को उचित मुआवजा तक नहीं मिला। केवल कोर्ट में पैसा जमा कर देना भुगतान नहीं माना जा सकता।

कोविड में ड्यूटी के दौरान मौत: मुआवजा क्यों नहीं मिला? सरकार से जवाब तलब

(Covid Duty Death Compensation) एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने कोरोना काल में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जान गंवाने वाली सरकारी कर्मचारी के आश्रितों को मुआवजा नहीं देने पर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने प्रमुख राजस्व सचिव, प्रमुख वित्त सचिव और टोंक कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसकी मां गाती देवी टोंक तहसील कार्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थीं और कंट्रोल रूम ड्यूटी के दौरान संक्रमित हो गईं। 24 नवंबर 2020 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। राज्य सरकार ने 11 अप्रैल 2020 को आदेश जारी कर ऐसे मामलों में 70 लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान किया था, लेकिन अब तक परिवार को राशि नहीं मिली। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए जवाब तलब किया है।

दिव्यांग छात्रा को MBBS में प्रवेश का आदेश, नहीं मिली सीट तो 2026 में मिलेगा मौका

(MBBS Admission High Court Order) तीसरे अहम फैसले में हाईकोर्ट ने दिव्यांग छात्रा को बड़ी राहत दी है। नीट यूजी-2025 में दिव्यांग कोटे में मेरिट में आने के बावजूद प्रवेश से वंचित छात्रा को अदालत ने MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने कहा कि यदि इस सत्र में सीट उपलब्ध नहीं है तो उसे 2026 के सत्र में सीट आवंटित की जाए। अदालत ने यह भी माना कि छात्रा एम्स दिल्ली में प्रवेश के लिए पात्र है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगता के बावजूद छात्रा मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम है।