आरआईसी में ‘रिफॉर्मेटिव गवर्नेंस’ पर मंथन, डॉ. राकेश हूजा की स्मृति में संगोष्ठी आयोजित

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास बोले—“अधिकतम शासन–न्यूनतम सरकार” मॉडल से सशक्त हुआ राजस्थान

आरआईसी में ‘रिफॉर्मेटिव गवर्नेंस’ पर मंथन, डॉ. राकेश हूजा की स्मृति में संगोष्ठी आयोजित

अनन्य सोच। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में डॉ. राकेश हूजा की स्मृति में ‘रिफॉर्मेटिव गवर्नेंस’ विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान “अधिकतम शासन – न्यूनतम सरकार” मॉडल का सफलतापूर्वक अनुसरण कर रहा है, जो प्रशासनिक दक्षता और जनसेवा के संतुलन का प्रतीक है।

मुख्य सचिव ने बताया कि राजस्थान की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता प्रशासनिक कार्यों को चुनौतीपूर्ण बनाती है, लेकिन मजबूत शासन प्रणाली इसे प्रभावी बनाती है। उन्होंने ‘सिटीजन-सेंट्रिक गवर्नेंस’ को राज्य के विकास का आधार बताते हुए कहा कि शासन का केंद्र हमेशा नागरिक होना चाहिए।

डॉ. राकेश हूजा को श्रद्धांजलि देते हुए श्री श्रीनिवास ने उन्हें एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद, कुशल प्रशासक और संस्थान निर्माता बताया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि डॉ. हूजा के साथ कार्य करना उनके लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी शैक्षणिक और प्रशासनिक विरासत आज भी नई पीढ़ी के अधिकारियों को मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।

उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आईएएस अधिकारी निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण सम्मानित हैं। “मैं नैतिक हूं, मैं जवाबदेह हूं, मैं आईएएस हूं” जैसे सिद्धांत प्रशासनिक आचरण की नींव हैं। उन्होंने आधार, डीबीटी, यूपीआई और मनरेगा जैसी डिजिटल पहलों को सेवा वितरण में क्रांतिकारी बताते हुए तकनीक की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम में एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें ललित के. पंवार और सतीश माथुर ने अपने विचार साझा किए। चर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार स्वाति वशिष्ठ ने किया।

डॉ. पंवार ने कहा कि सिटिजन-सेंट्रिक गवर्नेंस सहभागिता, जवाबदेही, पारदर्शिता और सुगमता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को ‘गो-गेटर’ बनने की सलाह देते हुए सक्रियता और नवाचार पर बल दिया। वहीं सतीश माथुर ने पुलिस प्रशासन में निष्पक्षता और जनता के प्रति सुलभता को सबसे महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के अंत में हिमांगिनी हूजा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इससे पूर्व मुख्य वक्ता और पैनलिस्टों का सम्मान मीनाक्षी हूजा, रमेश अरोड़ा, रीमा हूजा, रजत हूजा और रक्षत हूजा द्वारा किया गया। यह संगोष्ठी ‘विकसित राजस्थान’ की दिशा में प्रशासनिक सुधारों पर सार्थक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।