गायिका संजीवनी भेलांडे और गायक जुगल किशोर की मनमोहक प्रस्तुति ने शाम को सुरों और एहसासों से रंगीन बनाया
Ananya soch: The captivating performance of singer Sanjivani Bhelande and singer Jugal Kishore filled the evening with tunes and emotions.
अनन्य सोच। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआइसी) के मुख्य ऑडिटोरियम में सोमवार की शाम रोमांटिक फिल्मी गीतों की महफ़िल ‘मौसम है आशिक़ाना’ ने संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया. लोकप्रिय गायिका संजीवनी भेलांडे और गायक जुगल किशोर की मनमोहक प्रस्तुति ने शाम को सुरों और एहसासों से रंगीन बना दिया. दो घंटे तक चले इस संगीत समारोह में करीब 20 लोकप्रिय गीत पेश किए गए.
संजीवनी ने अपने मधुर स्वर से ‘ज्योति कलश छलके...’, ‘अजीब दास्तां है ये...’, ‘पिया तोहे नैना लागे रे...’, ‘लग जा गले...’ जैसे कालजयी गीतों के साथ कौमी तराना ‘वंदे मातरम्’ गाकर समा बांध दिया. दर्शकों ने विशेष रूप से उनके सुपरहिट फिल्म ‘करीब’ के गीत ‘चोरी चोरी जब नज़रें मिलीं...’ पर खूब तालियां बजाईं. उन्होंने दो सुंदर मेडले प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया.
जुगल किशोर ने ‘इशारों-इशारों में दिल लेने वाले...’ और ‘कुहू कुहू बोले कोयलिया...’ जैसे युगल गीतों में संजीवनी का संगत किया, वहीं ‘तुम जो मिल गए हो...’ और ‘नज़र ना लग जाए...’ जैसे सोलो गीतों से श्रोताओं का दिल जीत लिया.
दिल्ली के प्रसिद्ध बैंड ‘डो-रे-मी’, सतीश पोपली के नेतृत्व में, लाइव म्यूज़िक संग कार्यक्रम का आकर्षण बना रहा. समापन पर आरआइसी निदेशक एन.सी. गोयल ने सभी कलाकारों और सहयोगियों को सम्मानित किया. यह संध्या जयपुरवासियों के लिए यादगार संगीत अनुभव बन गई.
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