श्रीलंका में रेनबो आर्ट ग्रुप के कलाकारों की प्रदर्शनी

Jul 20, 2025 - 14:34
Jul 22, 2025 - 08:32
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श्रीलंका में रेनबो आर्ट ग्रुप के कलाकारों की प्रदर्शनी

Ananya soch: Exhibition of artists of Rainbow Art Group in Sri Lanka

अनन्य सोच। हाल ही में कला के दुनिया ने एक नया अंक जुड़ा जिसके तहत पिछले सप्ताह रेनबो आर्ट ग्रुप दिल्ली द्वारा पड़ोसी देश श्रीलंका के कोलंबो के गैलरी क्यूराडो आर्ट स्पेस में एक अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी ''अनचार्टेड'' का आयोजन किया गया था. इस प्रदर्शनी में 6 देशों के कुल उन्चास प्रसिद्ध समकालीन कलाकारों की प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसमें राजस्थान से डॉ. रेनू शाही के तीन चित्र सम्मिलित थे जो की श्रीमद्भगवतगीता के श्लोकों पर आधारित है. चित्र में इन्होंने मनुष्य के तीन गुणों को केन्द्र में रखकर उनसे संबंधित देवताओं को प्रतीकात्मक रूप में संयोजीत किया है. 4 से 10 जुलाई तक चलने वाले प्रदर्शनी का उद्घाटन दीर्घा की निदेशक शनिला एलेस द्वारा किया गया. तथा संयोजन वीरेंद्र कुमार ने किया, इनकी संस्था रेनबो आर्ट ग्रुप का उदेश्य ऐसे कलाकारों को आगे लाना है जो मुख्य रूप से भारतीय संस्कृति पर चित्र निर्माण कर रहे हैं. 

 पिछले कई वर्षों से रेनबो आर्ट वर्ल्ड कला और कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए एक दृष्टि और उद्देश्य बन गया है. कला एक ऐसा माध्यम है जिसे किसी भाषा की आवश्यकता नहीं है और यह सभी सीमाओं को पार करती है. इसीलिए यह स्थापित, मध्यम और नए कलाकारों सभी की कृतियों को प्रदर्शित करता है. डॉ. रेनू शाही के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बना चुके अन्य कलाकारों में विरेंद्र कुमार, बनिता रानी सिंह, भास्कर घोष, चंदना मिश्रा भट्टाचार्य, ध्रुव कुमार, दिगंता बैश्य, डॉ. अर्चना तिवारी, डॉ. अवनी शाह, डॉ. चेतना अग्रवाल, गौतम पार्थो रॉय, जसप्रीत मोहन सिंह, मंजू साध, मनोज चक्रवर्ती, एम.डी. अलमर्श साहा, मिनी सुबोथ, मुस्तजाब शेल्ले, नयना अरविंद मेवाड़ा, नीलू पटेल, नीना, मोना जैन, परिनीता बुजोर बरुआ, प्रलय दत्ता, प्रशांत कुमार माजी, पुनीत मदान, पुष्पांजलि पांडा, राजेश कुमार, राम प्रतिहार, रेखा कुमारी, रीता रॉय, समीर पाल, सनी के डागर, सुधा मिश्रा, वेंकट अय्यर भारत से तथा मुन्ना सर्राफ नेपाल से, रजिया फैजल श्रीलंका से, सुबैर अबसन कतर से, तामार सरसेह इंडोनेशिया से, विक्टोरिया वालुक बेलारूस से जुडे़ कलाकारों ने इस प्रदर्शनी में अपनी कृतियों से श्री लंका के दर्शको का मन मोह इसी कारण कुछ कृतियों की बिक्री भी हुई. वहा के लोगों भारतीय संस्कृति से बहुत लगाव है.