नंदी की मौन उपस्थिति में गूंजता कला का स्वर: “रंग-ए-राजस्थान” के चौथे दिन उमड़ा जनसैलाब

आध्यात्म और समकालीन कला का अनोखा संगम बना आकर्षण का केंद्र

नंदी की मौन उपस्थिति में गूंजता कला का स्वर: “रंग-ए-राजस्थान” के चौथे दिन उमड़ा जनसैलाब

अनन्य सोच। Rajasthan International Centre में आयोजित “रंग-ए-राजस्थान आर्ट एग्ज़ीबिशन” अपने चौथे दिन भी कला प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी रही। सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक खुली इस प्रदर्शनी में शहरभर से कलाकार, विद्यार्थी और कला प्रेमी बड़ी संख्या में पहुंचे, जिससे पूरा परिसर जीवंत और रंगों से सराबोर नजर आया।

क्यूरेटर निखत अंसारी के निर्देशन में सजी विविध कला शैलियां

प्रदर्शनी की क्यूरेटर निखत अंसारी के कुशल निर्देशन में यह आयोजन राजस्थान की समृद्ध कला परंपरा और आधुनिक अभिव्यक्तियों का सुंदर मेल प्रस्तुत कर रहा है। यहां पारंपरिक और समकालीन कला शैलियों का संतुलित संगम देखने को मिल रहा है, जो हर आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।

डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा की पेंटिंग बनी चर्चा का केंद्र

इस एग्ज़ीबिशन का सबसे बड़ा आकर्षण आर्टिस्ट डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा की पेंटिंग “नंदी इधर-उधर” रही। बनारस की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरित इस रियलिस्टिक कलाकृति में मंदिर परिसर के भीतर दो व्यक्तियों के संवाद को दर्शाया गया है। वहीं, ऊपर और नीचे मौजूद नंदी की आकृतियां उस बातचीत को मानो शांत भाव से सुनती प्रतीत होती हैं। यह पेंटिंग आध्यात्मिकता और दैनिक जीवन के बीच गहरे जुड़ाव को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।

हनुमान चालीसा सीरीज़ को लेकर बढ़ी उत्सुकता

डॉ. विश्वकर्मा इन दिनों हनुमान चालीसा पर आधारित एक विशेष पेंटिंग श्रृंखला पर कार्य कर रहे हैं। इस नई श्रृंखला को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिल रही है, जिससे आने वाले समय में और भी आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है।

एग्ज़ीबिशन-कम-सेल: कला को घर ले जाने का मौका

यह प्रदर्शनी “एग्ज़ीबिशन-कम-सेल” के रूप में आयोजित की गई है, जहां दर्शक अपनी पसंदीदा कलाकृतियों को खरीद भी सकते हैं। यह पहल कला को केवल देखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे लोगों के जीवन का हिस्सा बनाने का अवसर भी देती है।

आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा कला का यह रंगीन उत्सव

“रंग-ए-राजस्थान” का यह कला उत्सव लगातार दर्शकों को आकर्षित कर रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी इसी तरह कला प्रेमियों का उत्साह बना रहेगा और यह प्रदर्शनी शहर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगी।