Lokrang 2026: जवाहर कला केंद्र में Punjab की Luddi और Langa Gayan ने बांधा समां
जयपुर के Jawahar Kala Kendra में Lokrang के 29वें संस्करण के पांचवें दिन Punjab की Luddi, Rajasthan के Langa Gayan और कई राज्यों की Folk Art प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीता।
अनन्य सोच । Jawahar Kala Kendra में चल रहे 11 दिवसीय राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव Lokrang के 29वें संस्करण के पांचवें दिन शनिवार को मध्यवर्ती मंच पर Punjab की Luddi ने खास रंग जमाया। गायक के सधे सुरों और साजिंदों की संगत के बीच दर्शक लगातार तालियों से कलाकारों का हौसला बढ़ाते रहे। उत्तर प्रदेश के Pai Danda ने भी मंच पर अलग छाप छोड़ी।
Luddi: जीत और खुशी का जश्न
Luddi पंजाब का पारंपरिक Folk Dance है, जो जीत, कामयाबी और शादी-ब्याह जैसे खुशी के मौकों पर किया जाता है। सिर की नफासत भरी हरकतें, तालियां, उंगलियों की चटकारी और गोल घूमते कदम इसकी पहचान हैं। बताया जाता है कि इसकी शुरुआत सांदल बार क्षेत्र में हुई, जहां लोहार जैसे समुदाय किसी उपलब्धि या मुकाबले की जीत का जश्न मनाने के लिए इसे करते थे। कलाकारों ने इसे जोश और मस्ती के साथ पेश किया।
Langa Gayan के सुरों ने जमाई महफिल
मध्यवर्ती मंच पर शाम की शुरुआत राजस्थान के Langa Gayan से हुई। बुंदू खां और उनकी टीम ने सुर छेड़े तो माहौल बदल गया। Langa Gayan राजस्थान की Folk Music परंपरा की खास पहचान है। सधे गायन और साजों की संगत ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा और हर तान पर दाद मिलती रही।
सरहदों से परे सजी लोक विरासत
Luddi और Langa Gayan के अलावा मणिपुर का Lai Haraoba और Thangta, तमिलनाडु का Karaikal Kavadi Attam, Thappattam और Jhikattam तथा Purulia Chhau की प्रस्तुतियां हुईं। राजस्थान का Chang Dance, महाराष्ट्र की Lavani और गुजरात का Talwar Raas भी दर्शकों को खूब पसंद आया। अलग-अलग राज्यों की वेशभूषा, ताल और अदाओं ने मंच को रंगों से भर दिया।
शिल्पग्राम में माटी की खुशबू
Shilpgram में कठपुतली, बहुरूपिया, आदिवासी नृत्य, लोक गायन, अलगोजा वादन, जादू कला, पद गायन, मांड गायन और चकरी नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। बाड़मेर के मांगणियार कलाकारों ने सुर साधे। जम्मू-कश्मीर का Jagrana, हिमाचल की Kinnauri Nati, गोवा का Kunbi Dance और हरियाणा का Phag भी आकर्षण रहे। नोखा, बीकानेर के कलाकारों का Agni Nritya रोमांच का केंद्र रहा।
दिनभर कला प्रेमियों का जमघट लगा रहा और हर प्रस्तुति के बाद मंच तालियों से गूंजता रहा।