माटी की महक बेंगलुरु तक: राजस्थान स्थापना दिवस पर प्रवासियों ने दिखाई सांस्कृतिक एकजुटता
लोकभवन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संबोधन | प्रवासी राजस्थानियों को बताया सांस्कृतिक राजदूत | ग्लोबल एग्रीटेक मीट में भागीदारी का आह्वान
अनन्य सोच। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित लोकभवन में रविवार को राजस्थान राज्य स्थापना दिवस समारोह उत्साह और गौरव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समारोह में शिरकत करते हुए राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को याद किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का स्थापना दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और अखंड एकता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्थापना दिवस को अंग्रेजी कैलेंडर की बजाय भारतीय पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाने की परंपरा शुरू की है, जिससे हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और मजबूत हुआ है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रवासी राजस्थानियों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानी अपनी माटी से दूर रहकर भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को सहेजे हुए हैं, जो अत्यंत प्रेरणादायक है। वे न केवल अपनी पहचान बनाए रखते हैं, बल्कि जहां भी रहते हैं वहां राजस्थान की सांस्कृतिक छाप भी छोड़ते हैं।
मुख्यमंत्री ने “कर्मभूमि से जन्मभूमि” जैसे अभियानों में प्रवासी राजस्थानियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने प्रदेश के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 10 दिसंबर 2025 को जयपुर में आयोजित पहले प्रवासी राजस्थानी दिवस ने देश-विदेश में बसे राजस्थानियों को एक मंच पर लाने का सफल प्रयास किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने आगामी 23 से 25 मई को आयोजित होने वाले “ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट” में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने के लिए प्रवासी राजस्थानियों को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कृषि क्षेत्र में नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा।
समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत सहित बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी मौजूद रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि दूरी चाहे कितनी भी हो, राजस्थानियों का अपनी माटी से जुड़ाव हमेशा अटूट रहता है।