राजस्थान पुलिस का बड़ा कदम: जीआरएम मॉड्यूल से अब ऑनलाइन होगी शिकायत से समाधान तक पूरी प्रक्रिया

साइबर ठगी में फ्रीज खातों से मिलेगी राहत

May 19, 2026 - 08:29
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राजस्थान पुलिस का बड़ा कदम: जीआरएम मॉड्यूल से अब ऑनलाइन होगी शिकायत से समाधान तक पूरी प्रक्रिया

अनन्य सोच। साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच Rajasthan Police ने आमजन को बड़ी राहत देने की दिशा में अहम पहल की है। साइबर अपराधों की जांच के दौरान संदिग्ध ट्रांजेक्शन के कारण फ्रीज, लियन या होल्ड किए जाने वाले बैंक खातों की समस्या अब ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए आसानी से सुलझाई जा सकेगी। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित GRM Module (ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म) अब खाताधारकों के लिए पारदर्शी और जवाबदेह समाधान के रूप में सामने आया है।

राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक Cyber Crime वी. के. सिंह ने बताया कि साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए राज्य स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जीआरएम मॉड्यूल को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है, जिससे अब खाताधारकों को पुलिस, बैंक और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध तरीके से संचालित की जाएगी।

क्या है जीआरएम मॉड्यूल?

जीआरएम मॉड्यूल एक ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली है, जो नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के तहत कार्य करती है। इसका उद्देश्य उन वास्तविक खाताधारकों को राहत पहुंचाना है, जिनके बैंक खाते साइबर अपराध जांच के दौरान संदिग्ध ट्रांजेक्शन के आधार पर अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिए जाते हैं।

अब तक ऐसे मामलों में निर्दोष खाताधारकों को बैंक और पुलिस के बीच लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई बार शिकायत के समाधान में हफ्तों और महीनों का समय लग जाता था। नई व्यवस्था के तहत शिकायत दर्ज होने से लेकर जांच और निर्णय तक की प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी।

ऐसे काम करेगा पूरा सिस्टम

जीआरएम प्रक्रिया के तहत सबसे पहले खाताधारक अपनी संबंधित बैंक शाखा में जाकर खाते को अनफ्रीज करवाने या लियन हटाने के लिए आवेदन देगा। इसके बाद बैंक संबंधित व्यक्ति की केवाईसी और ट्रांजेक्शन डिटेल्स का सत्यापन करेगा।

सत्यापन के बाद बैंक जीआरएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर एक यूनिक ग्रीवेंस आईडी जनरेट करेगा। इसके बाद मामला संबंधित थाना पुलिस के जांच अधिकारी को भेजा जाएगा।

पुलिस जांच अधिकारी ट्रांजेक्शन ट्रेल, संदिग्ध गतिविधियों और फ्रॉड में संभावित संलिप्तता की विस्तृत जांच करेगा। जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खाताधारक का पक्ष भी सुना जाएगा। जांच पूरी होने के बाद अधिकारी खाते को अनफ्रीज करने, लियन हटाने या शिकायत खारिज करने का निर्णय लेकर बैंक को सूचित करेगा।

तीन स्तरों पर तय की गई जवाबदेही

जीआरएम प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और बैंक दोनों स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।

पुलिस स्तर पर राज्य स्तर पर डीआईजी रैंक अधिकारी, जिला स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक या डीएसपी और थाना स्तर पर जांच अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं बैंक स्तर पर नेशनल नोडल ऑफिसर, स्टेट ग्रीवेंस ऑफिसर और ब्रांच ग्रीवेंस ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं।

यदि किसी खाताधारक की शिकायत थाना स्तर पर खारिज होती है, तो वह जिला और राज्य स्तर के ग्रीवेंस रिड्रेसल ऑफिसर (GRO) के समक्ष अपील भी कर सकता है।

राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन और निजी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी व्यक्ति का बैंक खाता अचानक फ्रीज हो जाता है और वह स्वयं को निर्दोष मानता है, तो तुरंत अपनी बैंक शाखा से संपर्क कर जीआरएम प्रक्रिया शुरू करवाएं।

साइबर ठगी या संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में नागरिक National Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।