सेना में जाने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन कई जिंदगीयों में भर दी नई उम्मीद: 19 वर्षीय जिज्ञांशु ने अंगदान से रचा मानवता का मिसाल

सड़क हादसे में ब्रेन डेड हुए झुंझुनूं के युवा के अंगों का सफल रिट्रीवल; एम्स जोधपुर, एसएमएस जयपुर और एसडीएमएच की टीमों ने रातभर चलाया ऑपरेशन

May 28, 2026 - 14:51
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सेना में जाने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन कई जिंदगीयों में भर दी नई उम्मीद: 19 वर्षीय जिज्ञांशु ने अंगदान से रचा मानवता का मिसाल

अनन्य सोच। झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव रसूलपुर अहीरान का 19 वर्षीय जिज्ञांशु भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसका लिया गया एक फैसला कई लोगों की जिंदगी में नई रोशनी बन गया। भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना देखने वाले इस युवा ने मृत्यु के बाद अंगदान कर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। 23 मई की रात एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए जिज्ञांशु को पहले नारनौल और फिर जयपुर रेफर किया गया। संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल अस्पताल (एसडीएमएच) में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सिर में गंभीर चोटों के कारण उन्हें ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा।

इसके बाद अस्पताल की टीम ने परिवार को अंगदान के बारे में समझाया। बेटे को खोने के असहनीय दर्द के बीच भी पिता दलीप सिंह, माता अनीता देवी और पूरे परिवार ने अंगदान के लिए सहमति देकर अद्भुत साहस और संवेदनशीलता का परिचय दिया। परिवार के इस फैसले ने कई जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद दी।

रातभर चली जटिल चिकित्सकीय प्रक्रिया में एम्स जोधपुर, एसएमएस मेडिकल College जयपुर और एसडीएमएच की विशेषज्ञ टीमों ने मिलकर अंगों का सफल रिट्रीवल किया। डॉ. राजेश भोजवानी, डॉ. संजय मित्तल और एनेस्थीसिया टीम सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पूरी प्रक्रिया को सफल बनाया।

28 मई की सुबह लीवर को समय पर पहुंचाने के लिए जयपुर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जबकि एसडीएमएच में किडनी का कैडेवर ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया गया। NOTTO, ROTTO North और SOTTO राजस्थान की टीमों ने भी पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जिज्ञांशु क्रिकेट प्रेमी, ऊर्जावान और देशभक्ति से भरे युवा थे। परिवार का सपना था कि वह सेना में जाकर देश की सेवा करे। हालांकि किस्मत ने उनका रास्ता बदल दिया, लेकिन अंगदान के जरिए उन्होंने मौत के बाद भी इंसानियत की सेवा कर दिखाया।

एसडीएमएच सचिव योगेंद्र दुर्लभजी ने कहा कि “दुःख की सबसे कठिन घड़ी में भी ऐसा निर्णय लेना असाधारण मानवता का परिचायक है।” अब जिज्ञांशु की कहानी समाज में अंगदान के प्रति नई जागरूकता और प्रेरणा बनकर उभर रही है।