अब मातृभाषा में मिलेगा न्याय और सरकारी काम, AI बनेगा माध्यम
जयपुर में हुए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में देश-विदेश के एक्सपर्ट्स ने बताया कैसे AI बदल देगा गवर्नेंस की तस्वीर, भारत बन रहा दुनिया की तीसरी बड़ी AI पावर
अनन्य सोच। अगर आपको भी सरकारी दफ्तरों में अंग्रेजी या हिंदी की जटिल भाषा समझने में परेशानी होती है, तो अब यह समस्या जल्द खत्म होने वाली है। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के पहले प्लेनरी सेशन में इसी मुद्दे पर गहन मंथन हुआ। सेशन का विषय था 'AI Based Governance For All', जिसमें देश के टॉप एक्सपर्ट्स ने आम आदमी की जिंदगी आसान बनाने वाले कई अहम खुलासे किए।
मातृभाषा में मिलेगा न्याय, नहीं पड़ेगी अनुवादक की जरूरत
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि भाषिणी जैसे AI प्लेटफॉर्म अब आम लोगों को अपनी मातृभाषा में सरकारी काम कराने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि CP Gram जैसे ऐप न्यायिक कार्यवाहियों का स्थानीय भाषा में अनुवाद कर लोगों को उनकी भाषा में न्याय दिलाने में सहायक बन रहे हैं।
भारत बना रहा 60 लाख AI वर्कफोर्स, दुनिया में तीसरा नंबर
इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय की वैज्ञानिक-जी कविता भाटिया ने चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया - भारत में 60 लाख AI वर्कफोर्स और 2 लाख स्टार्टअप्स तैयार हो चुके हैं। AI Vibrancy Index में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। कई राज्य सरकारें अब सड़कों के गड्ढे खोजने तक AI का इस्तेमाल कर रही हैं।
गरीबों के लिए 'सबसे बड़ा इक्वलाइजर' बनेगा AI
डेलॉइट के एन.एस.एन. मूर्ति ने बताया कि कैसे AI किसानों और दिव्यांगजनों की जिंदगी बदल रहा है। गेट्स फाउंडेशन के अर्नव कपूर ने कहा कि AI दुनिया का सबसे बड़ा 'इक्वलाइजर' बन सकता है, बशर्ते लोगों में इसके प्रति भरोसा कायम हो। नीति आयोग के प्रदीप सिंह ने बताया कि 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में फ्रंटियर टेक हब अहम भूमिका निभाएगा। सेशन में राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी मौजूद रहे।