26 करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स की बन गई एक यूनिक पहचान: जानें क्या है APAAR ID और Academic Bank of Credits, जो बदल रहा है भारत की एजुकेशन सिस्टम

One Nation One Student ID के तहत बनी 26.35 करोड़ APAAR ID, अब पढ़ाई बीच में छोड़ने पर भी नहीं जाएगा एक भी क्रेडिट बेकार; जानें पूरा सिस्टम कैसे करता है काम

Jul 5, 2026 - 22:19
Jul 5, 2026 - 22:27
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26 करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स की बन गई एक यूनिक पहचान: जानें क्या है APAAR ID और Academic Bank of Credits, जो बदल रहा है भारत की एजुकेशन सिस्टम

अनन्य सोच। भारत की एजुकेशन सिस्टम में एक बड़ी क्रांति चुपचाप अपनी जड़ें जमा चुकी है। शिक्षा मंत्रालय का Academic Bank of Credits (ABC) प्लेटफॉर्म, जिसे University Grants Commission (UGC) रेगुलेट करता है, अब देश के करोड़ों स्टूडेंट्स की एजुकेशन जर्नी को पूरी तरह डिजिटल बना चुका है। इसका सीधा मकसद है — छात्रों के क्रेडिट्स को जमा करना, मैनेज करना, ट्रांसफर करना और इस्तेमाल करना, वो भी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर।

इस पूरे सिस्टम की जान है APAAR ID यानी Automated Permanent Academic Account Registry, जो हर स्टूडेंट को मिलने वाला एक यूनिक 12-अंकों का पहचान नंबर है। "One Nation, One Student ID" पहल के तहत शुरू हुई यह ID अब तक कमाल का आंकड़ा छू चुकी है — 2 जुलाई 2026 तक पूरे भारत में 26.35 करोड़ वेरिफाइड APAAR ID बन चुकी हैं। सबसे खास बात यह है कि दूर-दराज इलाकों के स्टूडेंट्स भी नजदीकी Common Service Centre (CSC) के जरिए यह ID बनवा सकते हैं।

लेकिन असली गेम-चेंजर है इसका सबसे बड़ा फायदा — अगर कोई स्टूडेंट पढ़ाई बीच में छोड़ देता है, तो उसके कमाए हुए क्रेडिट्स इस डेटा बैंक में सुरक्षित जमा रहते हैं। जब भी वह दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहे, इन्हीं क्रेडिट्स के दम पर आगे बढ़ सकता है। यह पूरा सिस्टम National Education Policy (NEP) 2020 के Multiple Entry-Multiple Exit (MEME) फ्रेमवर्क पर आधारित है, जिसे अभी 700 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज और 6,600 कॉलेज अपना चुके हैं।

आंकड़ों की बात करें तो अकेले उच्च शिक्षा संस्थानों में 4.79 करोड़ से ज्यादा APAAR ID बन चुकी हैं और लगभग 9.77 करोड़ क्रेडिट रिकॉर्ड्स मैप हो चुके हैं। इसके अलावा स्कूली शिक्षा में भी 16.62 करोड़ APAAR ID तैयार हो चुकी हैं। एक दिलचस्प फायदा यह भी है कि 13 से 30 साल की उम्र के छात्र APAAR ID वेरिफाई कराकर ट्रैवल में बेस एयरफेयर पर 10% छूट और 10 किलो एक्स्ट्रा बैगेज अलाउंस जैसे बेनिफिट्स भी पा सकते हैं।

आगे चलकर यह सिस्टम ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से भी जुड़ने वाला है, जिससे डिजिटल क्रेडेंशियल्स और भी सुरक्षित व छेड़छाड़-रोधी बनेंगे। यानी भारत की एजुकेशन सिस्टम अब वाकई डिजिटल फ्यूचर की तरफ तेजी से बढ़ रही है।