Bhashini और IISc Bengaluru ने बनाया Saurashtra Text-to-Speech Model, Low-Resource Language को मिली डिजिटल आवाज़
Bhashini और IISc Bengaluru ने Saurashtra भाषा के लिए Text-to-Speech (TTS) मॉडल विकसित किए। जानिए 28 घंटे के Speech Corpus, VITS आर्किटेक्चर और AIKosh पर उपलब्धता।
अनन्य सोच । डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (DIBD) ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के सहयोग से सौराष्ट्र भाषा के लिए Text-to-Speech (TTS) मॉडल विकसित किए हैं। PIB Delhi द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, सौराष्ट्र एक अल्पसंख्यक हिंद-आर्यन भाषा है, जो मुख्य रूप से तमिलनाडु में सौराष्ट्र समुदाय द्वारा बोली जाती है। इस पहल का उद्देश्य सीमित डिजिटल संसाधनों वाली भाषाओं के लिए Speech Technology का दायरा बढ़ाना है।
VITS Architecture और दो लिपियों में आवाज़ें
नए मॉडल VITS आर्किटेक्चर पर आधारित हैं और सीधे टेक्स्ट से सौराष्ट्र स्पीच तैयार कर सकते हैं। इनमें पुरुष और महिला, दोनों आवाज़ें शामिल हैं और हर आवाज़ तमिल तथा सौराष्ट्र, दोनों लिपियों के टेक्स्ट के लिए उपलब्ध है। इस तरह कुल चार मॉडल बने हैं। ये 22,050 हर्ट्ज़ पर ऑडियो बनाते हैं और अक्षर-स्तर के टेक्स्ट पर काम करते हैं, इसलिए अलग से फोनेमाइज़र की जरूरत नहीं पड़ती।
28 घंटे का Speech Corpus और AIKosh
मॉडलों की ट्रेनिंग IISc की SPIRE Lab में तैयार सौराष्ट्र Speech Corpus से हुई है। इसमें 28 घंटे से अधिक की जेंडर-बैलेंस्ड रिकॉर्डिंग हैं, जिनमें एक पुरुष और एक महिला वॉयस आर्टिस्ट की आवाज़ शामिल है। पुरुष आवाज़ का मॉडल लगभग 10,000 वाक्यों और महिला आवाज़ का मॉडल लगभग 11,400 वाक्यों पर प्रशिक्षित हुआ। यह SPICOR TTS 3.0 सौराष्ट्र कॉर्पस अब Bhashini के AIKosh प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिससे शोधकर्ता और डेवलपर्स इसका उपयोग कर सकते हैं।
शिक्षा, Accessibility और भाषा संरक्षण में उपयोग
2011 की जनगणना के अनुसार सौराष्ट्र बोलने वालों की संख्या लगभग 2.48 लाख है, जबकि इस भाषा की डिजिटल मौजूदगी सीमित है। ये मॉडल सौराष्ट्र टेक्स्ट को जोर से पढ़ने, Language Learning और Accessibility Solutions जैसे उपयोगों में मदद कर सकते हैं। साथ ही, ये शिक्षा और अन्य सार्वजनिक डिजिटल सेवाओं में सौराष्ट्र भाषा की तकनीकें विकसित करने का आधार भी देते हैं।
भाषिनी वर्तमान में 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय ध्वनि भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में सहयोग करता है।