Jaipur Literature Festival के 20वें संस्करण की दूसरी Speakers List जारी, भारतीय भाषाओं के Multilingual Literature पर रहेगा खास जोर

Jaipur Literature Festival के ऐतिहासिक 20वें संस्करण की दूसरी Speakers List आई। नमिता गोखले के अनुसार इस बार भारत के बहुभाषी साहित्य पर खास ज़ोर रहेगा।

Oct 29, 2026 - 15:31
Oct 29, 2026 - 15:33
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Jaipur Literature Festival के 20वें संस्करण की दूसरी Speakers List जारी, भारतीय भाषाओं के Multilingual Literature पर रहेगा खास जोर

अनन्य सोच । Jaipur Literature Festival (JLF) अपने ऐतिहासिक 20वें संस्करण की ओर बढ़ रहा है और आयोजकों ने वक्ताओं की दूसरी सूची साझा कर दी है। इस सूची को फ़ेस्टिवल की उस सोच का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें समावेशी और लगातार बदलते साहित्यिक परिदृश्य को केंद्र में रखा जाता है।

नमिता गोखले ने क्या कहा

लेखिका, फ़ेस्टिवल की सह-संस्थापक और सह-निदेशक Namita Gokhale ने कहा कि किताबें हमारी अनेक दुनियाओं की खिड़कियाँ हैं। उनके अनुसार 20वाँ संस्करण बदलाव के लिए खुला रहेगा, यानी नए विचारों, बदलती तकनीकों और देखने के नए तरीक़ों के लिए। साथ ही यह शास्त्रीय और कालजयी साहित्य से भी जुड़ा रहेगा। उन्होंने बताया कि दुनिया भर से आने वाले लेखक और वक्ता अलग-अलग संस्कृतियों का नज़रिया सामने रखते हैं।

Multilingual Literature पर खास ज़ोर

इस संस्करण की सबसे अहम बात भारत के बहुभाषी साहित्य पर फ़ोकस है। गोखले के मुताबिक़ सभी प्रमुख Indian Languages के लेखक सत्रों, परिचर्चाओं और पाठों में हिस्सा लेंगे। इससे क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक दृश्यता मिलने की उम्मीद है, जो पाठकों और साहित्य-प्रेमियों के लिए अच्छा संकेत है।

परंपरा और नए विचारों का संतुलन

आयोजकों का कहना है कि फ़ेस्टिवल स्थापित परंपराओं को अपनाता है, पर नए विचारों, अनजानी कहानियों और दुनिया भर के नज़रियों को भी जगह देता है। इसके मूल में यह विश्वास है कि किताबें और विचार सिर्फ़ पन्नों या व्याख्यान-कक्षों तक सीमित नहीं हैं। वे आदान-प्रदान, बहस, जिज्ञासा और जुड़ाव को जन्म देते हैं।

विचारों की विविधता का मंच

साहित्य, इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और समकालीन चिंतन के अपने अनूठे मेल के साथ JLF एक ऐसा Literary Festival बना हुआ है, जहाँ पाठक, लेखक और श्रोता अपने से अलग नज़रियों से रू-ब-रू होते हैं। आयोजकों के अनुसार इस बार भी कार्यक्रम एक साहित्यिक मैराथन होगा, जिसकी पहचान विचारों की विविधता और स्वतंत्रता है। यहाँ होने वाले संवादों की गूँज सत्र ख़त्म होने के बाद भी देर तक बनी रहती है।