Lokrang 2026: जवाहर कला केन्द्र में Goa के Samai Dance ने बिखेरी दीपों की रौशनी, दूसरे दिन उमड़े कला प्रेमी
Jaipur के Jawahar Kala Kendra में Lokrang Festival के 29वें संस्करण के दूसरे दिन Goa का Samai Dance, Gulabo Sapera की प्रस्तुति और Shilpgram Craft Fair रहे आकर्षण का केंद्र।
अनन्य सोच । Jawahar Kala Kendra में चल रहे 11 दिवसीय National Folk Art Festival 'Lokrang' के 29वें संस्करण के दूसरे दिन बुधवार को कला और संस्कृति का अनूठा संगम दिखा। शाम ढलते ही Madhyavarti में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। Shilpgram में भी दिनभर रंगारंग गतिविधियाँ चलती रहीं।
Goa के Samai Dance ने बांधा समां
प्रस्तुतियों की शुरुआत Goa के पारंपरिक Samai Dance से हुई। यह नृत्य Shigmotsav और अन्य धार्मिक उत्सवों में पेश किया जाता है और गोवा की समृद्ध Folk Culture का अहम हिस्सा है। कलाकारों ने पीतल के सिर पर जलते दीपों को संतुलित रखते हुए लयबद्ध नृत्य किया। घुमट और समेल जैसे वाद्यों की संगत ने प्रस्तुति में सुरीला रंग घोल दिया। दीपों की लौ और कलाकारों का संतुलन देख दर्शक मंत्रमुग्ध नज़र आए।
देशभर की Cultural Diversity का रंग
Samai के बाद मंच पर Himachal Pradesh का क्यांग, Manipur का थांगता, Jammu-Kashmir का जागरणा और Chhattisgarh का ककसार नृत्य पेश किया गया। इसके बाद Rajasthan की आंगी गैर ने जोश भरा। Jharkhand के Purulia Chhau ने अपने शारीरिक कौशल से तालियां बटोरीं, जबकि Manipur के नागा नृत्य को भी सराहना मिली। कार्यक्रम का समापन Rajasthan की मशहूर कलाकार Gulabo Sapera (गुलाबो कालबेलिया) की प्रस्तुति से हुआ।
Shilpgram में Folk Performances की बहार
Shilpgram में जयपुर के राजेश भाट ने Puppet Show दिखाया, जबकि महबूब ने Bahurupiya कला से दर्शकों को गुदगुदाया। दौसा के दिपांशु ने पद गायन, जयपुर की अंजना शर्मा ने चरी नृत्य, राजेन्द्र राव ने चिरमी नृत्य और नमिता जैन ने घूमर प्रस्तुत किया। दौसा के दयाशंकर ने भवाई, बारां के सूरज ने चकरी और पंजाब के कलाकारों ने लुड्डी नृत्य पेश किया। नागौर के मानाराम ने तेजा गायन से लोक देवता की गाथा सुनाई।
Handicraft Fair में उमड़ी भीड़
लोकरंग के दूसरे दिन Shilpgram में National Handicraft Fair की रौनक देखने लायक रही। करीब 150 शिल्पकारों के स्टॉल पर हथकरघा वस्त्र, टेराकोटा, काष्ठ कला, चमड़े की नक्काशी और लोक चित्रकला देखने जयपुरवासियों व सैलानियों की भीड़ जुटी। लोगों ने कारीगरों से उनके हुनर के बारे में जाना और पारंपरिक आभूषण व धातु शिल्प खरीदे।
महोत्सव में देश की विविध लोक परंपराओं का यह मेल सांस्कृतिक एकता की मिसाल बना हुआ है। आने वाले दिनों में भी अलग-अलग राज्यों के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।