चाँदनी रात में झिलमिलाया राग शुद्ध कल्याण, उस्ताद शुजात ख़ाँ के सितार ने रचा अलौकिक संगीत-संसार जयपुर।
Ananya soch
अनन्य सोच। कार्तिक मास की पंचमी की उजली रात, जब आकाश में पूर्णिमा की चाँदनी खिली थी, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर का वातावरण एक अद्भुत संगीत-रस से भर गया. म्यूज़िक इन द पार्क की ‘अनहद’ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित इस निशुल्क संगीतमय संध्या में पद्मभूषण उस्ताद शुजात ख़ाँ ने अपने सितार से राग शुद्ध कल्याण का जादू बिखेर दिया. जैसे ही ख़ाँ साहब ने कल्याण थाट के इस पवित्र राग के सुर छेड़े, श्रोताओं ने महसूस किया कि मानो स्वयं चाँदनी उन सुरों में घुल गई हो. राग की आरंभिक रचना में उन्होंने भूपाली की सादगी और कल्याण की उज्ज्वल गरिमा को अपनी अनूठी गायकी और वादन शैली से इस तरह गूंथा कि हर स्वर में एक दिव्यता झिलमिलाने लगी.
कभी मींड की कोमलता से, तो कभी स्वरों की गहराई से उन्होंने इस राग को आत्मा की भाषा में ढाल दिया. उनके सितार के साथ जब तबले और ढोलक की थापें गूँजीं, तो लगा मानो ताल और स्वर के बीच कोई आत्मीय संवाद हो रहा हो — सूक्ष्म, सौम्य और अविस्मरणीय.
शुजात ख़ाँ की प्रस्तुति के बाद श्रोतागण देर तक मंत्रमुग्ध बैठे रहे। उन्होंने न केवल वादन में, बल्कि अपनी मधुर आवाज़ से भी उस रात्रि को भक्ति और माधुर्य से भर दिया. यह सिर्फ़ एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बन गया, जहाँ सुर, शब्द और भावना एकाकार हो गए.
इस अनहद श्रृंखला का कुशल संयोजन अनु चंडोक और हिमानी खींची ने किया. कार्यक्रम हर माह के दूसरे शनिवार को आयोजित किया जाएगा, ताकि जयपुरवासी इस तरह की आत्मिक संगीत-संध्याओं का आनंद नियमित रूप से ले सकें.
राग परिचय:
थाट – कल्याण | समय – रात्रि का प्रथम प्रहर | आरोह – सा रे ग प ध सा | अवरोह – सा नी ध प म’ ग प ध नी सा | प्रकृति – शांति, माधुर्य और प्रकाश का राग
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