Vice President CP Radhakrishnan का NDC को संबोधन: "राष्ट्रीय संकल्प को राष्ट्रीय परिणामों में बदलें", Sovereignty के सम्मान का आह्वान

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के 66वें पाठ्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रीय हित, संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया।

Oct 12, 2026 - 23:21
Oct 12, 2026 - 23:22
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Vice President CP Radhakrishnan का NDC को संबोधन: "राष्ट्रीय संकल्प को राष्ट्रीय परिणामों में बदलें", Sovereignty के सम्मान का आह्वान

अनन्य सोच । उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को "भारत के मूल मूल्य, राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय उद्देश्य" विषय पर संबोधित किया। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, पुलिस और अन्य सरकारी संगठनों के अधिकारियों के साथ मित्र देशों के 41 अधिकारियों सहित कुल 122 प्रतिभागियों से रणनीतिक सोच, एकीकृत नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बात की। कार्यक्रम में NDC के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता, संकाय सदस्य और प्रतिभागी उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा, "राष्ट्रीय रणनीति को राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए कार्रवाई में और राष्ट्रीय संकल्प को राष्ट्रीय परिणामों में बदलना चाहिए।" उन्होंने भावी रणनीतिक नेताओं से संस्थागत और व्यावसायिक सीमाओं से परे एकीकृत व दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने, स्पष्ट लक्ष्य तय करने और उन्हें बुद्धिमानी से प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

Core Values और National Interest

राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्रीय मूल्य राष्ट्रीय पहचान की आधारशिला हैं और दुनिया के साथ किसी देश के जुड़ाव का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' का उल्लेख करते हुए कोविड-19 के दौरान वैक्सीन मैत्री पहल, आपदाओं में प्राथमिक सहायता देने की भूमिका और जलवायु परिवर्तन व आपदा से निपटने की अंतरराष्ट्रीय पहलों में भारत के नेतृत्व को इन मूल्यों के उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संप्रभुता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और राष्ट्र की एकता-अखंडता जैसे संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित हैं। उन्होंने पांच प्राथमिकताएं गिनाईं: संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा, लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष-संघीय स्वरूप को बनाए रखना, रणनीतिक-राजनीतिक-आर्थिक-सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाना, विकास के लिए स्थिर व सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय शांति व स्थिरता में योगदान देना।

Sovereignty और Global Power पर संदेश

उपराष्ट्रपति ने कहा, "प्रत्येक संप्रभु राष्ट्र समान है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा।" उन्होंने किसी भी देश द्वारा दूसरे देश की सीमाओं के अतिक्रमण न करने का आह्वान किया। उनके अनुसार अग्रणी वैश्विक शक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षा दूसरों पर प्रभुत्व जमाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई देश उस पर अपनी शर्तें न थोपे।

Security Challenges और Viksit Bharat 2047

राष्ट्रीय सुरक्षा के बढ़ते परस्पर जुड़ाव का जिक्र करते हुए उन्होंने आतंकवाद, साइबर खतरों, महामारियों, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के लिए अधिक सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और साझा वैश्विक हित अक्सर एक-दूसरे के पूरक होते हैं, जिनके लिए समन्वित कार्रवाई, सूचना साझाकरण और आपसी विश्वास जरूरी है।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने संसाधनों, सुदृढ़ नीतिगत विकल्पों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ दीर्घकालिक दृष्टिकोण को संरेखित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में भारत की भूमि, हवाई क्षेत्र, समुद्री हितों और साइबर क्षेत्र की रक्षा के साथ सतत विकास व समृद्धि की परिस्थितियां बनाना भी शामिल है।