EU FTA: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की Brussels में बैठकें, Trade और Green Tech पर चर्चा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने Brussels में European Commission अधिकारियों से मुलाकात की। India-EU FTA, Customs Cooperation, Market Access और Green Technology पर हुई चर्चा की पूरी जानकारी।
अनन्य सोच । वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ब्रुसेल्स में यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। PIB Delhi के अनुसार, इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना था। उन्होंने DG TRADE की महानिदेशक दित्ते जुएल जोर्जेंसन, DG INTPA के महानिदेशक कोएन डोएन्स और DG TAXUD के महानिदेशक गेरासिमोस थॉमस से मुलाकात की।
Market Access और Supply Chain पर फोकस
DG TRADE की महानिदेशक के साथ बैठक में दोनों पक्षों ने Bilateral Trade को आसान बनाने, Market Access बेहतर करने और Supply Chain Resilience मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। दोनों ने निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। शेष प्रक्रियात्मक और कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर संपर्क बनाए रखने पर भी सहमति बनी।
Customs Cooperation और Green Technology पर बातचीत
DG TAXUD के महानिदेशक के साथ बैठक Customs Cooperation, Trade Facilitation और India-EU FTA के कार्यान्वयन की तैयारियों पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने लेन-देन लागत घटाने और वैध व्यापार की सुगम आवाजाही के लिए पारदर्शी और डिजिटल रूप से सक्षम सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को जरूरी बताया। DG INTPA के साथ बैठक में Sustainable Development, Clean Energy और Green Technologies पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
Diamond Industry और BusinessEurope Roundtable
अग्रवाल ने एंटवर्प डायमंड इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों सहित हीरा उद्योग के हितधारकों से भी मुलाकात की। चर्चा में वैश्विक Diamond Value Chain, प्रमाणीकरण, ट्रेसेबिलिटी, जिम्मेदार सोर्सिंग और भारत के बढ़ते हीरा बाजार से जुड़े अवसर शामिल रहे। भारत और बेल्जियम ने रत्न एवं आभूषण को सहयोग का अहम क्षेत्र माना है, जिसमें एंटवर्प, मुंबई और सूरत प्रमुख केंद्र हैं। उन्होंने BusinessEurope गोलमेज बैठक में भी हिस्सा लिया। वहां उन्होंने भारत की आर्थिक वृद्धि, सुधारों की गति और निवेश अवसरों को रेखांकित किया और यूरोपीय कंपनियों को भारत की विस्तार लेती Value Chains में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।