“दूसरों के जहाज नहीं गिनेंगे, अपना समुद्री साम्राज्य बनाएंगे”
अनन्य सोच। भारत ने Maritime Sector में आत्मनिर्भरता की दिशा में 2047 का बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। सागर संवाद 2026 में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भारत केवल समुद्री कारोबार का बाजार नहीं, बल्कि Shipping Power बनना चाहता है।
Shipping India 2047 का विजन
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में Merchant Shipping Act 2025 और National Shipping Board के नए नियमों के जरिए समुद्री क्षेत्र में नियामक व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उनका कहना था कि सागर संवाद नीति-निर्माताओं, उद्योग, विशेषज्ञों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाकर भारत की भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
भारत में बनेंगे कंटेनर
सोनोवाल ने Container Manufacturing Assistance Scheme की सफलता का भी जिक्र किया। करीब 10,000 करोड़ रुपये की योजना के तहत भारत में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। खास बात यह है कि वैश्विक Shipping Company Maersk भी भारत में निर्मित कंटेनरों के लिए खरीद आदेश दे रही है। इससे देश में Shipbuilding और Container Manufacturing को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
2047 तक बंदरगाहों की क्षमता 10 हजार मिलियन टन
सरकार ने 2047 तक देश की Port Capacity को बढ़ाकर 10,000 Million Tonnes प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखा है। सोनोवाल ने National Shipping Board के पांच सूत्री कार्यक्रम का समर्थन करते हुए वित्तीय सुधार, Cargo Support, प्रतिस्पर्धी वित्तपोषण, Regulatory Ease और Ease of Doing Business को अहम बताया।
युवाओं के लिए खुलेगा समुद्र में रोजगार का रास्ता
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने Maritime Workforce – Opportunities and Challenges सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि Maritime Sector युवाओं के लिए बड़ा Employment Engine बन सकता है। उन्होंने Training Capacity बढ़ाने, Gender Equality, Cruise Shipping और Advanced Shipbuilding के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर जोर दिया।
विदेशी जहाज कंपनियों को 75 अरब डॉलर!
राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने भारतीय Tonnage बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए बताया कि भारत हर साल कच्चे तेल, गैस, कोयला और यूरिया जैसे महत्वपूर्ण Cargo की ढुलाई के लिए विदेशी Shipping Companies को करीब 75 अरब डॉलर का भुगतान करता है।
यही आंकड़ा इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी तस्वीर सामने रखता है—अगर भारत अपना Indian Tonnage और Shipping Fleet बढ़ाता है, तो आने वाले वर्षों में विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घट सकती है। अब सवाल सिर्फ जहाज बनाने का नहीं, बल्कि 2047 तक समुद्री व्यापार की कमान अपने हाथ में लेने का है.