Lokrang 2026 Jaipur: JKK में ओडिशा का संबलपुरी, असम का बिहू और त्रिपुरा का सांग्राई बना आकर्षण

Jawahar Kala Kendra में Lokrang के सातवें दिन ओडिशा का संबलपुरी, असम का बिहू और त्रिपुरा का सांग्राई नृत्य हुआ। मध्यवर्ती और शिल्पग्राम की सभी प्रस्तुतियां पढ़ें।

Nov 2, 2026 - 22:35
Nov 2, 2026 - 22:37
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Lokrang 2026 Jaipur: JKK में ओडिशा का संबलपुरी, असम का बिहू और त्रिपुरा का सांग्राई बना आकर्षण
Lokrang महोत्सव में Jawahar Kala Kendra के मंच पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार।

अनन्य सोच । जयपुर के Jawahar Kala Kendra में सोमवार को 11 दिवसीय राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव 'लोकरंग' के 29वें संस्करण का सातवां दिन रंगारंग रहा। मध्यवर्ती मंच पर ओडिशा, असम और त्रिपुरा के कलाकारों ने ऐसी Folk Dance प्रस्तुतियां दीं कि दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे। शिल्पग्राम में राजस्थान और अन्य राज्यों के लोक कलाकारों ने भी समां बांधा।

संबलपुरी नृत्य: ढोल-निसान की थाप पर झूमा मंच

पश्चिमी ओडिशा की लोकसंस्कृति में Sambalpuri Dance का विशेष स्थान है। यह नृत्य नुआखाई जैसे फसल उत्सव और रथयात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों में देखने को मिलता है। नुआखाई नई फसल के स्वागत का पर्व है। मंच पर ढोल, निसान, ताशा और माहुरी जैसे पारंपरिक वाद्यों की गूंज ने माहौल में जान डाल दी। सामूहिक प्रस्तुति के जरिए कलाकारों ने पश्चिमी ओडिशा की विरासत को खूबसूरती से पेश किया।

बिहू नृत्य: मेखेला की शान और खेतों की खुशबू

असम की पहचान Bihu Dance का रिश्ता वहां की खेती-किसानी से गहरा है। यह मुख्य रूप से रोंगाली बिहू से जुड़ा है, जो असमिया नववर्ष और वसंत के आगमन का प्रतीक है। दिवाली के आसपास मनाए जाने वाले काति बिहू में अच्छी फसल की कामना के साथ खेतों और तुलसी के पास मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। ढोल, पेपा, गोगोना और टोका की धुनों पर कलाकारों के कदम थिरके तो दर्शक भी झूम उठे। महिला नृत्यांगनाओं की पारंपरिक मेखेला चादर ने मंच की शोभा बढ़ाई।

सांग्राई नृत्य: छतरियों संग ताल से ताल

त्रिपुरा के मोग समुदाय का Sangrai Dance अप्रैल में नववर्ष के अवसर पर सांग्राई उत्सव के दौरान किया जाता है। बौद्ध और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा यह नृत्य नए साल की खुशी और भाईचारे का संदेश देता है। नर्तकों ने पारंपरिक छतरियों के साथ ताल मिलाकर ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

मध्यवर्ती और शिल्पग्राम की अन्य प्रस्तुतियां

मध्यवर्ती मंच पर झारखंड का सराईकेला छऊ, लद्दाख का जबरू, राजस्थान का चरी नृत्य और नड़ वादन, लक्षद्वीप का महल, गोवा का कोली नृत्य, गुजरात का गोप नृत्य, उत्तराखंड का छपेली और पंजाब का भांगड़ा हुआ। शिल्पग्राम में नोरती देवी की कठपुतली, सागर का बहुरूपिया, भीमा राणा का भवाई, राजकी का कालबेलिया, शकूर खान का मांगणियार गायन और मुरलीधर का भोपा गायन सहित कई प्रस्तुतियां हुईं। गोवा की देखणी, कश्मीर के रऊफ, गोवा के वीरभद्र और लक्षद्वीप की कोल काली ने भी दर्शकों का दिल जीता।