200 साल पुरानी वो पेंटिंग्स जो श्रीकृष्ण की भक्ति को कैनवास पर उतार देती हैं, जन्माष्टमी पर जयपुर में लगी खास प्रदर्शनी
सोना-चांदी से सजी दुर्लभ पिछवाई आर्टवर्क्स, 70 कलाकृतियों में छिपी है राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की पूरी कहानी
अनन्य सोच l। जन्माष्टमी के मौके पर जब पूरा देश श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में डूबा है, जयपुर की एक गैलरी में कुछ ऐसा हो रहा है जो कला प्रेमियों के लिए किसी सरप्राइज़ से कम नहीं। यहां 200 साल से भी पुरानी दुर्लभ पेंटिंग्स की एक ऐसी प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। आखिर इन तस्वीरों में ऐसा क्या खास है जो इन्हें सामान्य आर्टवर्क से अलग बनाता है?
आईसीए गैलरी और दर्शनम की ओर से शनिवार से शुरू हुई इस exhibition का नाम है 'पिछवाई थ्रू द एजेज़: आर्ट एंड वर्शिप'। इसमें श्रीनाथजी की भक्ति और नाथद्वारा की परंपरा को दर्शाने वाली pichhwai art की करीब 70 चुनिंदा कलाकृतियां शामिल हैं, जो मिशेल क्राइट्स और विजेंद्र बंसल के निजी संग्रह से ली गई हैं।
कार्यक्रम में वृंदावन के श्री राधा रमण मंदिर के आचार्य वैष्णवाचार्य अभिनव गोस्वामी महाराज, आम्रपाली के सह-संस्थापक राजीव अरोड़ा और art historian मिशेल क्राइट्स मुख्य अतिथि रहे। इसके अलावा आईसीए से विजेंद्र बंसल और अभिनव बंसल सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
लेकिन असली दिलचस्पी की बात यह है कि इन कलाकृतियों में सिर्फ पिछवाई शैली ही नहीं, बल्कि बूंदी, किशनगढ़, कोटा और रूपनगढ़ जैसी राजस्थानी traditional painting styles का भी अनोखा मेल देखने को मिलता है। इनमें हैंड एम्ब्रॉयडरी, जरदोजी वर्क, वॉश तकनीक के साथ-साथ असली सोने और चांदी का इस्तेमाल भी किया गया है, जो इन्हें और भी कीमती बना देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शनी सिर्फ धार्मिक कला की झलक नहीं, बल्कि राजस्थान की पूरी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है। यह art exhibition 10 सितंबर तक कला प्रेमियों, कलेक्टर्स और आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी।