शादी-तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, बहुविवाह पर पूर्ण रोक: राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी तेज, जानें क्या-क्या बदलेगा

राजस्थान में अब हर धर्म, जाति और समुदाय के लिए एक समान कानून लाने की तैयारी जोरों पर है। शादी से लेकर तलाक, संपत्ति के बंटवारे से लेकर लिव-इन रिलेशनशिप तक — हर पहलू में बड़ा बदलाव आने वाला है। सरकार ने इसके लिए हाई-प्रोफाइल कमेटी भी बना दी है। जानिए पूरी डिटेल में कि आम आदमी की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ेगा।

Jun 22, 2026 - 22:31
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शादी-तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, बहुविवाह पर पूर्ण रोक: राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी तेज, जानें क्या-क्या बदलेगा

अनन्य सोच। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी कि राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू होंगे, और इसके विधेयक का प्रारूप तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है।

जोगाराम पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 14 अप्रैल 2026 को हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस विषय पर सार्थक कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान आदिवासी समुदाय के रीति-रिवाजों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित प्रावधानों के मद्देनजर राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसके तहत राज्य को नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करना होता है।

जवाहर सिंह बेढम ने बताया कि "राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026" विधेयक का प्रारूप तैयार करने हेतु उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। समिति में सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, सेवानिवृत्त प्राचार्य रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान को सदस्य बनाया गया है, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।

उन्होंने बताया कि विधेयक के प्रारूप को समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए समिति संभाग स्तर पर जन-संवाद को प्राथमिकता देगी, और वेबसाइट के माध्यम से आम नागरिक अपने सुझाव सीधे समिति तक पहुंचा सकेंगे।

समान नागरिक संहिता का मुख्य ध्येय धर्म, जाति या समुदाय से परे सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है। वर्तमान में शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, गोद लेने जैसे मामलों में अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होते हैं, जिनमें मौजूद विसंगतियां यूसीसी लागू होने के बाद समाप्त हो जाएंगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को लैंगिक समानता और पुरुषों के बराबर अधिकार दिलाना है।

इस कानून के तहत विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन तथा पैतृक संपत्ति में बेटा-बेटी दोनों को समान अधिकार जैसे बड़े बदलाव शामिल होंगे। राज्य सरकार इसे राज्य की सामाजिक संरचना के अनुरूप एक प्रगतिशील कानून बनाने हेतु प्रतिबद्ध है।