'मेरे महबूब ना जा...' में झूमा जयपुर, सुमन कल्याणपुर को सुरीली श्रद्धांजलि

ढाई घंटे, 22 गाने और एक ऐसी शाम जिसने पुरानी यादों को फिर जिंदा कर दिया। आखिर क्यों यह कॉन्सर्ट बना जयपुर की सबसे इमोशनल म्यूजिकल इवनिंग? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।

Jul 8, 2026 - 22:35
Jul 8, 2026 - 22:37
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'मेरे महबूब ना जा...' में झूमा जयपुर, सुमन कल्याणपुर को सुरीली श्रद्धांजलि

अनन्य सोच। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में बुधवार शाम एक बेहद इमोशनल और सुरीला माहौल देखने को मिला, जब सुविख्यात गायिका सुमन कल्याणपुर को म्यूजिकल ट्रिब्यूट दिया गया। मुख्य ऑडिटोरियम में शाम 6.30 बजे शुरू हुई यह संगीत संध्या 'मेरे महबूब ना जा...' करीब सवा दो घंटे तक चली, जिसमें सुमनजी के 22 फ़िल्मी गीत प्रस्तुत किए गए।

मुंबई की पॉपुलर सिंगर संजीवनी भेलांडे ने अपनी दमदार आवाज से इस ट्रिब्यूट कॉन्सर्ट को सजाया, जबकि युवा गायक चिराग़ पांचाल ने युगल गीतों में उनका बखूबी साथ निभाया। कार्यक्रम की शुरुआत फ़िल्म 'जहां प्यार मिले' (1968) के टाइटल सॉन्ग 'चले जा चले जा चले जा...' से हुई। इसके बाद 'अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया...' और 'ना तुम हमें जानों...' जैसे कर्णप्रिय गीतों ने माहौल को और खूबसूरत बना दिया।

इवनिंग का सबसे दिलचस्प पल तब आया जब संजीवनी और चिराग़ ने मिलकर 'तुमने पुकारा और हम चले आए...', 'अजहूं ना आए बालमा...' और 'दिल एक मंदिर है...' जैसे लोकप्रिय डुएट्स प्रस्तुत किए। खास बात यह रही कि सुमनजी के राजस्थानी फिल्मी सफर को भी नहीं भुलाया गया — हिट फिल्म 'बाबा रामदेव' (1963) का यादगार गीत भी इस लिस्ट में शामिल किया गया।

सावन के मौसम को ध्यान में रखते हुए 'गरजत बरसत सावन आयो रे...' और 'शराबी शराबी ये सावन का मौसम...' जैसे गीतों ने सुरों की बारिश कर दी। वहीं रक्षाबंधन के भावुक गीत 'बहना ने भाई की कलाई से...' ने कई श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। कॉन्सर्ट का समापन फ़िल्म 'ममता' (1966) के मशहूर गीत 'रहें ना रहें हम...' के साथ हुआ, जिसे सुनकर पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा।

लाइव म्यूजिक की जिम्मेदारी दिल्ली के मशहूर बैंड 'डो-रे-मी' ने संभाली, जिसने पूरे कार्यक्रम में जान डाल दी।