‘मांगलिक’ सुनते ही रिश्ता तोड़ देते हैं लोग! क्या सच में इतना खतरनाक है Mangal Dosh? Vedic Astrology Expert ने बताए चौंकाने वाले तथ्य
"लड़की मांगलिक है..." यह एक वाक्य आज भी हजारों रिश्तों को बनने से पहले ही तोड़ देता है। कई परिवार बिना पूरी जानकारी के शादी से इनकार कर देते हैं। लेकिन क्या Mangal Dosh वास्तव में इतना भयावह है, जितना समाज में माना जाता है? Vedic Astrology Expert प्रेरणा ए. जैन ने उन मिथकों से पर्दा उठाया है, जो वर्षों से लोगों को भ्रमित करते आ रहे हैं। पूरी सच्चाई जानने के बाद शायद मांगलिक दोष को लेकर आपकी सोच भी बदल जाए।
अनन्य सोच। भारतीय संस्कृति में Marriage केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों के मिलन का पवित्र संस्कार माना जाता है। यही कारण है कि विवाह से पहले Kundli Matching की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन इस प्रक्रिया में एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही कई परिवार घबरा जाते हैं— Mangal Dosh। कई बार सिर्फ "मांगलिक" होने की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकरा दिए जाते हैं। हालांकि Vedic Astrology Expert प्रेरणा ए. जैन का कहना है कि यह डर अधूरी जानकारी और सामाजिक धारणाओं पर आधारित है।
विशेषज्ञ के अनुसार, जब जन्मकुंडली में Mars (मंगल ग्रह) प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तब उसे मांगलिक योग या मांगलिक दोष कहा जाता है। हालांकि इसकी गणना के नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यदि इसकी ऊर्जा असंतुलित हो तो वैवाहिक जीवन में मतभेद, जल्दबाजी या अहंकार जैसी स्थितियां बन सकती हैं। लेकिन केवल मंगल की स्थिति देखकर किसी व्यक्ति के पूरे वैवाहिक जीवन का निर्णय करना शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
समाज में एक और धारणा बहुत प्रचलित है कि 27 या 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक दोष स्वतः समाप्त हो जाता है। प्रेरणा जैन इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानतीं। उनका कहना है कि इस उम्र तक व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक परिपक्व हो जाता है और निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो जाती है। इसलिए मंगल की उग्र ऊर्जा का प्रभाव कम महसूस हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कुंडली से मंगल या उसका योग समाप्त हो गया।
विशेषज्ञ बताती हैं कि सबसे बड़ी गलती तब होती है, जब परिवार केवल "मांगलिक" शब्द सुनकर रिश्ता अस्वीकार कर देते हैं। जबकि Vedic Astrology में ऐसे कई Cancellation Rules बताए गए हैं, जिनसे मांगलिक दोष का प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो सकता है। उदाहरण के लिए यदि वर और वधू दोनों मांगलिक हों, दोनों की कुंडली में मंगल समान भाव में स्थित हो, Jupiter (गुरु) की शुभ दृष्टि प्राप्त हो या गुरु एवं शुक्र मजबूत स्थिति में हों, तो दोष का प्रभाव काफी कम माना जाता है।
प्रेरणा जैन के अनुसार, सबसे बड़ा भ्रम यह है कि मांगलिक व्यक्ति के जीवनसाथी की असमय मृत्यु हो जाती है। वह इसे पूरी तरह निराधार मानती हैं। इसी तरह यह मान लेना कि केवल लड़की के मांगलिक होने से समस्या आती है, या दो मांगलिक व्यक्तियों का विवाह नहीं होना चाहिए, भी शास्त्रों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी कुंडली का विश्लेषण केवल एक ग्रह के आधार पर नहीं किया जाता।
वे बताती हैं कि विवाह का निर्णय लेने से पहले सप्तम भाव, सप्तमेश, Venus (शुक्र), Jupiter (गुरु), Navamsha Kundli, Dasha, Gochar, Guna Milan और दोनों परिवारों की अनुकूलता जैसे अनेक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन आवश्यक होता है। यदि ये सभी कारक सकारात्मक हों, तो केवल मांगलिक दोष के आधार पर विवाह रोकना उचित नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करती हैं कि आज भी हजारों ऐसे दंपति हैं, जिनमें एक या दोनों मांगलिक हैं, लेकिन उनका वैवाहिक जीवन पूरी तरह सुखी और सफल है। इसका कारण यह है कि उनकी कुंडली में मौजूद अन्य शुभ योगों ने मांगलिक दोष के प्रभाव को संतुलित कर दिया।
उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया, अधूरी जानकारी या लोकमान्यताओं के आधार पर जीवन के सबसे महत्वपूर्ण निर्णय न लें। विवाह जैसा बड़ा फैसला हमेशा किसी अनुभवी Vedic Astrologer द्वारा संपूर्ण Kundli Analysis कराने के बाद ही लेना चाहिए। सही जानकारी न केवल भ्रम दूर करती है, बल्कि अनावश्यक डर को भी समाप्त कर देती है।
दरअसल, Mangal Dosh कोई अभिशाप नहीं, बल्कि जन्मकुंडली में बनने वाले अनेक योगों में से एक योग है। इसका प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में अलग-अलग हो सकता है। इसलिए केवल एक शब्द सुनकर रिश्ता तोड़ देना या भविष्य को लेकर भयभीत होना उचित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही विश्लेषण, संतुलित सोच और शास्त्रीय दृष्टिकोण ही वैवाहिक जीवन के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।