जंतर मंतर पर छिड़ी जंग: कॉकरोच बनकर सड़क पर उतरे छात्र, क्या झुकेगी सरकार?
NEET पेपर लीक और CBSE OSM विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से मामला बना राष्ट्रीय मुद्दा
अनन्य सोच। दिल्ली का जंतर मंतर एक बार फिर आंदोलन की गूंज से गूंज उठा है। इस बार मंच पर है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), जो NEET 2026 पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों को लामबंद कर रही है। कॉकरोच मास्क, थाली-चम्मच और नारों के साथ शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब सीधे केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक जा पहुंचा है।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में जून-जुलाई 2026 में यह आंदोलन तेजी से फैला। लद्दाख के जाने-माने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने इसे स्थानीय से राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। 20 जुलाई को निकाले गए "चलो संसद" मार्च को दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और आंसू गैस से रोका, जिसमें कई छात्र घायल हुए और कई हिरासत में लिए गए
विपक्ष ने इसे शिक्षा नीति की नाकामी बताते हुए संसद में मुद्दा उठाया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले दस वर्षों के पेपर लीक आंकड़े पेश करते हुए प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग की, जिससे मानसून सत्र कई दिन बाधित रहा। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन CJP ने इसे नाकाफी करार दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की बातचीत भी अब तक बेनतीजा रही है। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाते हुए कुछ मेट्रो स्टेशन बंद किए और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित कीं। सरकार इसे "राजनीतिक साजिश" बता रही है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे लोकतांत्रिक अधिकार का शांतिपूर्ण इस्तेमाल कह रहे हैं।
भारी बारिश और पुलिस कार्रवाई के बावजूद जंतर मंतर पर डटे छात्र अब यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या यह आंदोलन 2029 के चुनावों तक अपनी राजनीतिक छाप छोड़ पाएगा।