एक रात, एक मंच और आठ संगीतकारों की आत्माएं... जयपुर में 'गोल्डन 8' ने रच दिया फिल्मी संगीत का इतिहास
Golden Era of Bollywood Music को जिंदा करने वाला यह कॉन्सर्ट क्यों बना जयपुर के संगीत प्रेमियों के लिए साल की सबसे यादगार शाम, जानिए पूरी कहानी
अनन्य सोच। शहर के Maharana Pratap Auditorium में 20 जून की शाम कुछ ऐसा हुआ, जिसने हर संगीत प्रेमी के दिल को छू लिया। शंकर-जयकिशन, एस.डी. बर्मन, आर.डी. बर्मन, सलील चौधरी, रोशन, ओ.पी. नैयर, खय्याम और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल - इन आठ दिग्गज संगीतकारों की धुनें एक ही मंच पर, एक ही सांस में सुनने को मिलीं। Rohit Kataria Music Academy (RKMA) और Kataria Entertainment Group द्वारा आयोजित "Golden 8 - Music of Masters" नाम का यह कार्यक्रम महज एक Live Concert नहीं, बल्कि एक पूरी सांगीतिक यात्रा साबित हुआ।
शाम की शुरुआत राग ललित आधारित गीत "तू है मेरा प्रेम देवता" से हुई। मगर असली रोमांच तब बढ़ा जब "आ आ रे मितवा" और "फूल गेंदवा ना मारो" जैसी विरली सुनी जाने वाली Rare Songs को Live Orchestra के साथ प्रस्तुत किया गया - ऐसे गीत, जो आम तौर पर किसी कार्यक्रम में सुनने को नहीं मिलते।
श्री चंद्र कटारिया ने "मेरे महबूब कयामत होगी" से रोमांस की चाशनी घोली, तो ओ.पी. नैयर की कम सुनी गई रचना "औरों की क्यों हो गई" गाकर सबको चौंका दिया। डॉ. आकांक्षा दवे कटारिया ने Suman Kalyanpur और Asha Bhosle को श्रद्धांजलि देते हुए "रहे ना रहे हम" और "मेरा नाम चिन चिन चू" प्रस्तुत किया, और जब "पिया तोसे नैना लागे रे" गाया, तो पूरा सभागार Classical Music के सम्मोहन में डूब गया।
वृंदा कटारिया ने "अजीब दास्तां है ये" से Shankar-Jaikishan के दौर को सजीव किया, जबकि अनुराधा कटारिया की "बूझ मेरा क्या नाम रे" ने Shamshad Begum को सलाम किया। कार्यक्रम की सबसे खास बात रही इसका "Infotainment" फॉर्मूला, जिसमें राग पहाड़ी, खमाज और बिहाग की बारीकियां गीतों के बीच रोचक अंदाज़ में समझाई गईं। Sanjay Mathur Band की Live Orchestra Performance ने इस शाम को सोने पर सुहागा बना दिया।