"जिंदगी बनानी है तो हिंदुस्तान आओ": PM मोदी ने स्पेस स्टार्टअप संस्थापकों से की खुले दिल से बात, गिनाईं भारत की उपलब्धियां
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस स्टार्टअप CEOs से संवाद में निजी क्षेत्र की उपलब्धियों पर चर्चा की, स्काईरूट के पहले प्राइवेट रॉकेट लॉन्च से लेकर सैटेलाइट सर्विसिंग तक की बात हुई।
Quick Read / Key Highlights
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के स्पेस स्टार्टअप CEOs के साथ संवाद कर सेक्टर की प्रगति पर चर्चा की।
स्काईरूट के CEO ने बताया कि जुलाई में भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट सफलतापूर्वक सैटेलाइट प्रक्षेपित कर चुका है, अगले साल मध्य तक हर महीने एक लॉन्च का लक्ष्य।
सैटेलाइट सर्विसिंग, स्पेस फार्मा और डेड सैटेलाइट हटाने जैसी नई तकनीकों पर काम कर रहे कई स्टार्टअप संस्थापकों ने अपने विजन साझा किए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतिगत निरंतरता से निवेशकों और उद्यमियों में भरोसा बढ़ा है।
विदेश में बसे भारतीय प्रतिभाशाली युवा अब वापस लौटकर देश के स्पेस स्टार्टअप्स से जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं।
नीतिगत स्थिरता से बना भरोसे का माहौल
अनन्य सोच। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत के उभरते स्पेस स्टार्टअप्स के संस्थापकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक खुली और अनौपचारिक बातचीत की, जिसका मूल पाठ प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी किया गया। इस संवाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने जो भी नीतिगत निर्णय लिए, उनमें निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया गया, ताकि जोखिम उठाने वाले उद्यमियों को यह भरोसा रहे कि नीति में अचानक बदलाव नहीं होगा। उन्होंने इसे निवेशकों और स्टार्टअप संस्थापकों के बीच विश्वास पैदा करने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति बताया।
स्काईरूट की सफलता बनी मिसाल
बातचीत में शामिल एक CEO ने बताया कि उनकी कंपनी भारत की पहली स्पेस टेक यूनिकॉर्न है और जुलाई में उसने देश का पहला निजी रॉकेट सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर सैटेलाइट कक्षा में स्थापित किया। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष के मध्य तक हर महीने एक प्रक्षेपण करने की योजना है, और भविष्य में यह आवृत्ति साप्ताहिक और अंततः दैनिक स्तर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी तीन फैक्ट्रियां स्थापित कर चुकी है जिनकी संयुक्त क्षमता प्रति माह एक रॉकेट बनाने की है। इस सफलता के बाद सेक्टर में निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा अन्य स्टार्टअप्स को भी मिल रहा है।
नई तकनीकों पर काम कर रहे कई स्टार्टअप
बातचीत में मौजूद अन्य उद्यमियों ने अपने-अपने क्षेत्र की नवाचार परियोजनाओं की जानकारी दी। एक CEO ने बताया कि उनकी कंपनी सैटेलाइट को एक कक्षा से दूसरी कक्षा में पांच से पंद्रह वर्षों तक ले जाने वाले इंजन विकसित कर रही है, जिसे वैश्विक स्तर पर अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। एक अन्य स्टार्टअप रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट के माध्यम से कक्षा में निष्क्रिय पड़े सैटेलाइट को पकड़कर हटाने की तकनीक पर काम कर रहा है, जबकि एक कंपनी अंतरिक्ष में सैटेलाइट के डॉकिंग व रीफ्यूलिंग की दिशा में देश की पहली पहल बताई गई। इसके अलावा भारत के पहले स्पेस फार्मा स्टार्टअप की सह-संस्थापक ने बताया कि उनकी कंपनी अंतरिक्ष में दवाइयों के निर्माण की तकनीक विकसित कर रही है।
विदेश से लौट रही प्रतिभाएं
एक CEO ने बताया कि स्पेस सेक्टर के निजी क्षेत्र के लिए खुलने के बाद अमेरिका और यूरोप में बसे भारतीय मूल के पेशेवरों में स्वदेश लौटकर काम करने की रुचि बढ़ी है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा माहौल तैयार करना है कि दुनियाभर की प्रतिभाएं भारत के स्पेस स्टार्टअप्स से जुड़ना चाहें, जिससे देश एक वैश्विक टैलेंट चुंबक के रूप में उभर सके।
लागत, टैलेंट और जोखिम क्षमता में भारत आगे
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी है, प्रतिभा को लेकर कोई संदेह नहीं है, और देश के लोगों की जोखिम उठाने की क्षमता भी अधिक है, जो मिलकर भारत को इस क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बनाने में मदद कर सकते हैं। एक CEO ने यह भी बताया कि हाल के महीनों में एक के बाद एक अंतरराष्ट्रीय प्रक्षेपण अनुबंध मिलने लगे हैं, जिनमें अधिकांश विदेशी ग्राहकों से जुड़े हैं। संवाद के अंत में संस्थापकों ने प्रधानमंत्री को निजी क्षेत्र के लिए स्पेस सेक्टर खोलने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इसी नीति के चलते आज निजी सैटेलाइट के माध्यम से भारत की सुंदरता दुनिया के सामने आ रही है।