MMDR संशोधन अधिनियम 2026 से खनन क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव, जानें पूरा गणित

खान और खनिज संशोधन अधिनियम 2026 से राज्यों की मनमानी टैक्स वसूली पर लगेगी रोक, जानें भारत के खनिज आयात-निर्यात और रोजगार से जुड़े अहम आंकड़े।

Aug 24, 2026 - 16:01
Aug 24, 2026 - 17:43
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MMDR संशोधन अधिनियम 2026 से खनन क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव, जानें पूरा गणित

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खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 से राज्य सरकारें केंद्र की तय शर्तों के बाहर खनिज अधिकारों व भूमि पर नया कर नहीं लगा सकेंगी।

वर्तमान में राज्य खनन पर करीब 14 तरह के कर, प्रभार व शुल्क वसूलते हैं, कुछ राज्यों में यह दर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 10,12,529 करोड़ रुपये के खनिजों का आयात किया, जबकि घरेलू खनिज महंगे होने से निर्यात बाजार में हिस्सा घट रहा है।

अकेले लौह अयस्क से वित्त वर्ष 2025-26 में 15,136 करोड़ रुपये की कमाई हुई।

कोयला क्षेत्र से 5 लाख से अधिक तथा गैर-कोयला क्षेत्र से 1 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है।

बेलगाम कराधान पर लगेगी रोक

अनन्य सोच। भारत में खनन गतिविधियां खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत विनियमित होती रही हैं, लेकिन अब इस क्षेत्र के लिए एक समान और संतुलित वित्तीय ढांचा तैयार करने के मकसद से खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इस संशोधन के तहत राज्य सरकारें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अलावा खनिज अधिकारों तथा खनिज युक्त भूमि पर नया कर नहीं लगा सकेंगी, जिससे इस क्षेत्र पर लगातार बढ़ते कराधान के बोझ पर लगाम लगने की उम्मीद है।

14 प्रकार के कर वसूल रहे राज्य

वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य सरकारें खनन क्षेत्र पर लगभग 14 प्रकार के कर, प्रभार और शुल्क लगाती हैं, जिनमें रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डेड रेंट, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) भुगतान, जीएसटी और ट्रांजिट शुल्क शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि कुछ राज्यों ने खनिज वाली भूमि पर भी अलग से कर लगाना शुरू कर दिया, जो कुछ मामलों में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह नया अधिनियम इसी बढ़ते और असीमित कराधान बोझ को नियंत्रित करने का प्रयास है, जिसकी अब तक कोई निश्चित सीमा नहीं थी।

महत्वपूर्ण और परमाणु खनिजों तक बढ़ा दायरा

रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों और यूरेनियम जैसे परमाणु खनिजों पर भी कराधान का दायरा बढ़ चुका था, जिससे रणनीतिक रूप से अहम इन खनिजों के अन्वेषण व उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका थी।

आयात बढ़ा, निर्यात में घट रही हिस्सेदारी

आंकड़ों के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 10 लाख 12 हजार 529 करोड़ रुपये मूल्य के खनिजों का आयात किया। साथ ही, घरेलू खनिजों की बढ़ती लागत के चलते देश निर्यात बाजार में अपनी पकड़ खो रहा है। हालांकि अकेले लौह अयस्क के निर्यात से वित्त वर्ष 2025-26 में 15,136 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो इस क्षेत्र की संभावनाओं को दर्शाता है।

रोजगार पर भी बड़ा असर

खनन क्षेत्र देश में रोजगार का एक बड़ा स्रोत भी है। कोयला क्षेत्र प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जबकि गैर-कोयला क्षेत्र से 1 करोड़ से अधिक श्रमिक जुड़े हैं। ऐसे में स्थिर कराधान व्यवस्था न केवल निवेश आकर्षित करेगी बल्कि रोजगार सुरक्षा के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

विकसित भारत की दिशा में अहम कदम

विशेषज्ञों के अनुसार खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 भारत के खनिज शासन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य स्थिर और समान राजकोषीय व्यवस्था के जरिए खनिज अन्वेषण, महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा और सतत संसाधन विकास को मजबूत करना है, जो विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश की यात्रा को आगे बढ़ाने में सहायक साबित होगा।