जन आधार से पोषण ट्रैकर तक: टीना डाबी ने खोला डिजिटल राजस्थान का राज
टोंक कलेक्टर टीना डाबी से लेकर IT कमिश्नर तक ने बताया कैसे 'जन आधार', 'ई-मित्र' और 'राजकाज' बदल रहे हैं आम आदमी की जिंदगी, जानें पूरी डिजिटल क्रांति की कहानी
अनन्य सोच। 29वें National e-Governance Conference के दूसरे दिन आयोजित हुए Plenary Session-5 में एक ऐसा सवाल उठा, जिसका जवाब हर आम नागरिक जानना चाहता है — क्या सरकारी सेवाओं के लिए अब दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत खत्म हो जाएगी? 'Citizen Centric Governance: Inclusive Governance' विषय पर हुई इस चर्चा में राजस्थान के टॉप अधिकारियों ने जो तस्वीर पेश की, वह वाकई चौंकाने वाली है।
जंगल से लेकर गांव तक पहुंची डिजिटल क्रांति
सत्र की अध्यक्षता कर रहे PCCF अरिजीत बनर्जी ने खुलासा किया कि देश का पहला Digital Forest Stack 'डिजि-वन' अब विभागों के बीच सुरक्षित डेटा एक्सचेंज का जरिया बन चुका है। वहीं 'हरियालो राजस्थान मिशन' के तहत अब QR कोड स्कैन कर पौधे तक बुक किए जा रहे हैं।
डेटा बनेगा सरकार का सबसे बड़ा हथियार
जल जीवन मिशन के निदेशक राजन विशाल ने बड़ी बात कही — भरोसेमंद Data ही बेहतर नीतियों की नींव है। उन्होंने AgriStack, IFMS और Single Holding Procurement Portal का जिक्र करते हुए कहा कि अब सरकार 'रिएक्टिव' नहीं बल्कि 'प्रोएक्टिव' बनेगी, और इसमें AI की भूमिका आगे और बढ़ेगी।
राजकाज से लेकर जन सूचना पोर्टल तक
IT विभाग के कमिश्नर हिमांशु गुप्ता ने बताया कि 'राजकाज', 'राजस्थान संपर्क पोर्टल', 'जन सूचना पोर्टल' और 'ई-मित्र' जैसे प्लेटफॉर्म पारदर्शिता की मिसाल बन चुके हैं। खास बात यह कि 'राजकाज' से अब यह भी पता चल सकता है कि कोई अधिकारी फाइल निपटाने में कितना समय लगा रहा है!
टीना डाबी बोलीं—दूरी नागरिक नहीं, सरकार तय करे
सबसे दिलचस्प बयान टोंक कलेक्टर टीना डाबी का रहा। उन्होंने कहा कि 'जन आधार' से लेकर 'पोषण ट्रैकर' और 181 हेल्पलाइन तक, अब सेवाएं गांव-गांव पहुंच रही हैं ताकि दूरी अब बहाना न बने।
सत्र का संचालन प्राइमस पार्टनर्स के MD समीर जैन ने किया, जिन्होंने राजस्थान को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में गिनाया। अंत में विशेषज्ञों ने सवाल-जवाब सत्र में प्रतिभागियों की जिज्ञासाएं शांत कीं।