75 लाख लोगों की प्यास बुझाएगा यमुना का पानी, 295 KM पाइपलाइन से शेखावाटी में आएगी बड़ी राहत — CM का बड़ा ऐलान
पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते इलाकों की तस्वीर अब बदलने वाली है। सीकर, झुंझुनूं और चूरू के लाखों लोगों के लिए यमुना का पानी उम्मीद बनकर आ रहा है। जयपुर में हुए बड़े कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने ऐसी कई घोषणाएं कीं, जो राजस्थान की तस्वीर बदल सकती हैं। पूरी जानकारी यहां।
अनन्य सोच। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में आयोजित राजस्थान वाटर कॉन्क्लेव (Rajasthan Water Conclave) को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार गठन के तुरंत बाद से ही जल आत्मनिर्भरता (Water Self-Reliance) के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं, जिनका असर अब धरातल पर दिखने लगा है। उन्होंने कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना (Ram Jal Setu Link Project) से लेकर यमुना जल समझौते (Yamuna Water Agreement) तक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार राजस्थान को जल प्रबंधन के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि रामजल सेतु लिंक परियोजना से प्रदेश के 17 जिलों में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित होगी, साथ ही करीब 4 लाख 84 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं यमुना जल समझौते के तहत लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से 1,917 क्यूसेक पानी शेखावाटी क्षेत्र तक पहुंचेगा, जिससे सीकर, झुंझुनूं और चूरू के करीब 75 लाख लोगों को स्थायी पेयजल राहत मिलेगी। उदयपुर शहर के लिए देवास तृतीय एवं देवास चतुर्थ परियोजनाओं पर 1,691 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के लिए IGNP नहरी क्षेत्रों को मजबूत किया जा रहा है। परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना (Parvan Irrigation Project) पर अब तक 1,164 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो कोटा, बारां और झालावाड़ की लाइफलाइन साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए 'कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान' और 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' चलाए जा रहे हैं। अमृत 2.0 योजना के तहत 178 शहरी निकायों के लिए 5,100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) से 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से शुद्ध पानी मिल रहा है। बिजली के मोर्चे पर भी बड़ी उपलब्धि गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 जिलों में किसानों को दिनभर बिजली मिल रही है और 2027 तक यह सुविधा पूरे राज्य में लागू होगी। साथ ही जीरो टॉलरेंस नीति के चलते ढाई साल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ, जिससे युवाओं का भरोसा लौटा है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि जल संरक्षण अब सिर्फ सरकार का नहीं, हर नागरिक का साझा दायित्व है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पद्मश्री लक्ष्मण सिंह सहित कई जल विशेषज्ञ मौजूद रहे।