चूड़ियों के लाख से रच दी अनोखी कहानी! भारत की पहली Lac Artist द्रोपदी मीना की 100 कलाकृतियों ने जेकेके में बांधा कलाप्रेमियों का दिल
सुहागिनों की चूड़ियों में इस्तेमाल होने वाला लाख अब कैनवास पर जीवंत कहानियां बयां कर रहा है। जयपुर के जवाहर कला केंद्र में भारत की पहली Lac Artist द्रोपदी मीना की कलाकृतियों की प्रदर्शनी शुरू हुई है, जिसमें करीब 100 अनोखी रचनाएं प्रदर्शित हैं। आखिर इन कलाकृतियों में क्या खास है और कैसे यह पारंपरिक कला को मिल रही नई पहचान, जानिए पूरी रिपोर्ट में।
अनन्य सोच। Jawahar Kala Kendra की Parijat Art Gallery में गुरुवार को Lac Artist द्रोपदी मीना द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की दो दिवसीय Art Exhibition 'द पावर 2.0' की शुरुआत हुई। इसमें करीब 100 खूबसूरत रचनाएं प्रदर्शित की जा रही हैं। FICCI FLO जयपुर चैप्टर की Founder Chairperson नीता बूचरा ने मुख्य अतिथि के तौर पर रिबन काटकर व दीप प्रज्ज्वलन कर Exhibition का उद्घाटन किया।
उद्घाटन के बाद नीता बूचरा ने आर्टिस्ट द्रोपदी मीना की रचनाओं और इनके पीछे के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति और कला को संजोकर रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि द्रोपदी मीना जैसे कलाकारों को प्रोत्साहित कर प्राचीन कला को विलुप्त होने से बचाने में योगदान दिया जा सकता है।
द्रोपदी मीना भारत की पहली Lac Artist हैं, जो Lac को Painting, Sculptures और अन्य माध्यमों के जरिए नया रूप देती हैं। सुहागिनों के लिए चूड़ियां बनाने में इस्तेमाल होने वाले इस लाख को विशेष Technique से पिघलाकर और मोल्ड कर उन्होंने ये खूबसूरत Paintings तैयार की हैं। प्रदर्शनी में उन्होंने भगवान कृष्ण के विविध स्वरूपों को बखूबी प्रदर्शित किया है।
'लगन चौक' कलाकृति के माध्यम से आर्टिस्ट ने बताया कि शादियों के दौरान घरों की दीवारों पर यह बनाया जाता है। उन्होंने दीवारों को लाल कर लाख से इसे तैयार किया, जिसमें पालघाट देवी का चित्र देवी के आशीर्वाद का प्रतीक है। इसी तरह 'देव चौक' की कलाकृति में पालघाट देवी के साथ घोड़े व योद्धा भी बनाए गए हैं, जो नव विवाहित जोड़े की सुरक्षा और ब्रह्मांड के संतुलन को दर्शाते हैं।
मातृत्व, राजस्थानी संस्कृति, प्रकृति, महापुरुषों, धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों और समाज में महिलाओं की भूमिका पर आधारित Paintings को भी कलाप्रेमियों ने काफी सराहा। द्रोपदी ने Gond, Madhubani, Warli और Mandala शैलियों को लाख के माध्यम से कैनवास पर आधुनिक रूप में प्रस्तुत कर इन्हें नई पहचान दी है।