आंगनबाड़ी की टूटी छत से लेकर अटकी पेंशन तक! 181 हेल्पलाइन पर खुद अफसर ने फोन कर सुनी फरियादों की कहानी
जोधपुर के सौरव से लेकर भीलवाड़ा के फूलसिंह तक — इन आम लोगों की शिकायतें सीधे सचिवालय तक पहुंचीं। ICDS निदेशक ने खुद फोन उठाकर परिवादियों से बात की और जो सामने आया, वो चौंकाने वाला था।
अनन्य सोच। ICDS (समेकित बाल विकास सेवाएं) निदेशक वासुदेव मालावत ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 (Rajasthan Sampark 181) कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभाग से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान के सख्त निर्देश दिए।
निदेशक ने बताया कि 181 पोर्टल पर विभाग की शिकायतों के निस्तारण में 73.54 प्रतिशत नागरिक संतुष्टि (Citizen Satisfaction) मिली है, जो प्रभावी और जन-केंद्रित शिकायत निवारण व्यवस्था का सकारात्मक नतीजा है।
लेकिन असली दिलचस्प पल तब आया जब मालावत ने खुद फोन उठाकर परिवादियों से सीधी बातचीत शुरू की। जोधपुर के सौरव ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना (PM Matru Vandan Yojana) में आवेदन के बावजूद उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला। भीलवाड़ा के फूलसिंह और राहुल ने अपने क्षेत्र की आंगनबाड़ी की जर्जर हालत की शिकायत की, जबकि अलवर की प्रियंका ने आंगनबाड़ी केंद्र पर पोषाहार न मिलने की बात बताई। निदेशक ने हर शिकायत को संवेदनशीलता से सुना और तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
बैठक में सामने आए आंकड़े भी काफी दिलचस्प रहे। विभाग से जुड़ी कुल 41,222 शिकायतों में से 39,420 यानी 95.63 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है। औसतन एक शिकायत के निपटारे में 16 दिन का समय लग रहा है, जबकि फिलहाल 1,802 मामले लंबित हैं। राहत की बात यह रही कि 180 दिनों से ज्यादा पुराना कोई भी मामला लंबित नहीं है।
बैठक में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पूरक पोषण, आंगनबाड़ी सेवाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़ी शिकायतों पर भी विस्तार से चर्चा हुई और अधिकारियों को जल्द समाधान के निर्देश दिए गए।