राजस्थान में साइबर ठगी पर बड़ा प्रहार: 190 बैंक शाखाओं पर AI निगरानी, 1930 हेल्पलाइन पर 'जीरो टाइम लैग' से होगी त्वरित कार्रवाई

Jul 21, 2026 - 15:04
Jul 21, 2026 - 16:03
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राजस्थान में साइबर ठगी पर बड़ा प्रहार: 190 बैंक शाखाओं पर AI निगरानी, 1930 हेल्पलाइन पर 'जीरो टाइम लैग' से होगी त्वरित कार्रवाई

अनन्य सोच। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण और आम नागरिकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शासन सचिवालय में मंगलवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की विशेष साइबर समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में मुख्य सचिव ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे 'जीरो टाइम लैग' की नीति अपनाते हुए कार्य करें। उन्होंने कहा कि जैसे ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर किसी वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत प्राप्त हो, संबंधित बैंक तत्काल कार्रवाई करते हुए संदिग्ध खाते को होल्ड करें, ताकि पीड़ित की राशि सुरक्षित रखी जा सके। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान में बहुत कम मामलों में बैंक समय रहते धनराशि रोकने में सफल हो पाते हैं, जिसे सुधारना बेहद आवश्यक है।

निर्देशों के तहत बुधवार को सभी प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 साइबर कॉल सेंटर का दौरा करेंगे। इस दौरान वे शिकायत दर्ज होने से लेकर खाते को फ्रीज करने तक की पूरी प्रक्रिया को समझेंगे, जिससे पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य की 190 चिन्हित हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं और संदिग्ध एटीएम स्थानों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस द्वारा नियमित औचक निरीक्षण किए जाएंगे ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सके।

पुलिस महानिदेशक ने भारतीय रिजर्व बैंक के साइबर सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, म्यूल अकाउंट्स पर रोक लगाने तथा संदिग्ध खातों और संवेदनशील बैंक शाखाओं का केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार करने पर जोर दिया। वहीं वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने के लिए बैंक शाखाओं में विशेष सहायता काउंटर स्थापित करने, KYC संबंधी जानकारी केवल अधिकृत माध्यमों से भेजने तथा जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में उच्च मूल्य के चालू खातों का पुनः सत्यापन, मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) और ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (GRM) के माध्यम से पीड़ितों को शीघ्र राहत, भारी नकद निकासी पर अतिरिक्त सत्यापन तथा बैंक खाते किराए पर देने जैसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक, बैंकिंग सतर्कता और पुलिस के बेहतर समन्वय से राजस्थान साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।