राजस्थान के सतीश पूनिया को मिली पंजाब की कमान! BJP ने 3 राज्यों में बदले प्रभारी, अगले साल होने हैं चुनाव
BJP ने चुनावी साल से पहले संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए State In-Charge नियुक्त कर दिए हैं। राजस्थान के Satish Poonia को पंजाब, जबकि Vinod Tawde को उत्तर प्रदेश की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। आखिर इस बदलाव के पीछे पार्टी की क्या रणनीति है, जानिए पूरी खबर में।
अनन्य सोच। भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए Pradesh Prabhari (State In-Charge) और सह-प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। राजस्थान से राज्यसभा सांसद और पार्टी महासचिव डॉ. Satish Poonia को पंजाब का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है, जिससे राजस्थान की भूमिका एक बार फिर राष्ट्रीय संगठन में मजबूत होती दिख रही है।
Gujarat और UP में भी बदली कमान
वहीं गुजरात की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी Tarun Chugh को सौंपी गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद Vinod Tawde को उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ राष्ट्रीय मंत्री Jagdish Ishwarbhai Patel को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
पूनिया के कंधों पर पंजाब में संगठन मजबूत करने की चुनौती
पंजाब में डॉ. सतीश पूनिया को प्रभारी बनाए जाने से अब पार्टी के राज्य संगठन को मजबूती देने की बड़ी जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। गौरतलब है कि सतीश पूनिया राजस्थान BJP के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। इससे पहले 2024 में उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था, जबकि लोकसभा चुनाव में वे हरियाणा के चुनाव प्रभारी की भूमिका निभा चुके हैं। खास बात यह है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में BJP की लगातार तीसरी जीत के समय भी वे राज्य के प्रभारी थे।
अगले साल तीनों राज्यों में होने हैं Assembly Elections
उत्तर प्रदेश, गुजरात और पंजाब तीनों राज्यों में अगले साल Vidhan Sabha Elections होने हैं। उत्तर प्रदेश और गुजरात में BJP के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती होगी, जबकि पंजाब में पार्टी को अपना आधार और मजबूत करना होगा। ऐसे में इन तीन राज्यों में नए प्रभारियों की नियुक्ति को BJP की शुरुआती चुनावी तैयारियों और संगठन को धार देने की बड़ी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई जिम्मेदारी मिलने के बाद ये तीनों नेता अपने-अपने राज्यों में पार्टी को कैसे मजबूत करते हैं और आने वाले चुनावों में इसका कितना असर दिखता है।