वोटर लिस्ट के नाम पर फर्जी लिंक, OTP और QR कोड से सावधान: नगर निकाय चुनाव से पहले राजस्थान पुलिस की बड़ी एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने नगर निकाय चुनाव में फर्जी वोटर लिंक, OTP, QR कोड और डीपफेक से बचने की एडवाइजरी जारी की, ठगी होने पर 1930 पर करें शिकायत।
Quick Read / Key Highlights
राजस्थान पुलिस ने नगर निकाय व पंचायती राज चुनाव के दौरान साइबर ठगी को लेकर मतदाताओं, प्रत्याशियों व चुनाव कार्मिकों के लिए एडवाइजरी जारी की।
"वोटर लिस्ट में नाम देखें" जैसे फर्जी WhatsApp/SMS लिंक पर क्लिक न करें, केवल आधिकारिक चुनाव आयोग वेबसाइट का करें उपयोग।
चुनाव अधिकारी बताकर OTP, बैंक विवरण या UPI PIN मांगने वालों से सतर्क रहने की चेतावनी।
नेताओं के फर्जी वीडियो, डीपफेक और वायरल ऑडियो पर बिना पुष्टि विश्वास न करने की सलाह।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930, 9257510100 पर करें शिकायत।
चुनाव के दौरान साइबर ठगों की सक्रियता बढ़ने की आशंका
अनन्य सोच। नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के आगामी आम चुनाव के मद्देनजर राजस्थान पुलिस ने साइबर सुरक्षा को लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी इस एडवाइजरी में आशंका जताई गई है कि साइबर ठग मतदाताओं, चुनाव प्रत्याशियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं तथा चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों को निशाना बनाकर वित्तीय धोखाधड़ी और भ्रामक सूचनाएं फैला सकते हैं।
फर्जी वोटर लिस्ट लिंक से रहें सतर्क
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं) वी.के. सिंह ने बताया कि साइबर ठग "अपना नाम वोटर लिस्ट में देखें" या "आपका पोलिंग बूथ बदल गया है" जैसे संदेश भेजकर फर्जी लिंक पर क्लिक करा सकते हैं। ऐसे किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए और मतदाता सूची संबंधी जानकारी के लिए केवल राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग तथा CEO राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।
OTP और बैंक विवरण कभी साझा न करें
एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि चुनाव आयोग का अधिकारी बताकर वोटर कार्ड अपडेट या सत्यापन के नाम पर फोन करने वाला व्यक्ति साइबर ठग हो सकता है। ऐसे किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, बैंक विवरण, UPI PIN या अन्य निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
डीपफेक और वायरल कंटेंट पर सतर्कता जरूरी
चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर नेताओं के नाम से फर्जी वीडियो, ऑडियो और डीपफेक सामग्री वायरल होने की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने अपील की है कि किसी भी सामग्री को बिना आधिकारिक पुष्टि के सच न मानें और उसे आगे फॉरवर्ड करने से पहले सत्यता जांच लें।
प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं के लिए विशेष निर्देश
चुनाव प्रत्याशियों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से सक्रिय रखें, मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें तथा किसी अनजान लिंक के माध्यम से लॉगिन जानकारी साझा न करें। इसके अलावा चुनावी चंदे के नाम पर मिलने वाले UPI लिंक और QR कोड की भी अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी गई है, क्योंकि पैसा प्राप्त करने के लिए कभी भी UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।
WhatsApp ग्रुप एडमिन व चुनाव कार्मिकों को भी सतर्कता के निर्देश
पुलिस ने WhatsApp ग्रुप एडमिन को भी सतर्क रहने और भरोसेमंद सदस्यों को ही संदेश पोस्ट करने की अनुमति देने को कहा है। वहीं चुनाव ड्यूटी में तैनात कार्मिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चुनावी डेटा या EVM/VVPAT से जुड़ी संवेदनशील जानकारी निजी डिवाइस या असुरक्षित पब्लिक वाई-फाई पर साझा न करें।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
एडवाइजरी में बताया गया है कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन, राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। पुलिस ने अपील की है कि "सतर्क मतदाता ही सुरक्षित मतदाता है", इसलिए किसी भी चुनावी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि जरूर करें।