100 साल बाद टूटेगी खामोशी! वरुण सागर झील की गहराई में छुपा खजाना होगा बाहर
अजमेर की ऎतिहासिक वरुण सागर झील में निर्माण के बाद पहली बार होगी डीसिल्टिंग, जल संसाधन मंत्री ने किया बड़ा ऐलान, 500 करोड़ से बदलेगी अजमेर की तस्वीर
अनन्य सोच। राजस्थान के अजमेर जिले की ऎतिहासिक वरुण सागर झील को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। झील के बनने के बाद पहली बार, यानी पूरे 100 वर्षों बाद, इसकी खुदाई यानी डीसिल्टिंग का काम शुरू हो गया है। शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इस ऎतिहासिक कार्य का शुभारम्भ किया।
देवनानी ने इसे अजमेर के लिए "ऎतिहासिक क्षण" बताते हुए कहा कि इस डीसिल्टिंग वर्क से झील अधिक गहरी होगी, जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी और बारिश के दौरान शहर को जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी। साथ ही अतिक्रमण हटने से झील की प्राकृतिक सुंदरता भी निखरेगी। उन्होंने बताया कि झील पर भगवान वरुण देव की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी और आसपास का गार्डन एरिया भी पूरी तरह कायाकल्प होगा।
मंत्री सुरेश सिंह रावत ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में पूरे राजस्थान में लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से झीलों, तालाबों और जल स्रोतों की सफाई का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। अजमेर में 31 करोड़ रुपये से झील व नदियों का डीसिल्टिंग वर्क होगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत वरुण सागर से करीब 1,88,400 क्यूबिक मीटर गाद निकाली जाएगी, जिससे भराव क्षमता 6.65 एमसीएफटी बढ़ेगी। इसके अलावा रूप नदी, डाई नदी, सागरमती नदी, सहोदरा नदी और माशी नदी की भी डीसिल्टिंग की जाएगी, जिससे बाढ़ और कटाव की समस्या से किसानों को राहत मिलेगी। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष रमेश सोनी समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।