लेह-लद्दाख में देवनानी ने की सिंधु पूजा, बोले- ये नदी नहीं भारत की आत्मा है
प्रथम सिंधु कुंभ में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भगवान झूलेलाल की आराधना कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की, लद्दाख की वादियों में दिखा राष्ट्रीय एकता का अनोखा नजारा
अनन्य सोच। लेह-लद्दाख की बर्फीली वादियों में इन दिनों कुछ ऐसा हो रहा है जो इतिहास में दर्ज होने वाला है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रथम सिंधु कुंभ के पावन अवसर पर सिंधु घाट पर पहुंचकर मां सिंधु नदी एवं भगवान झूलेलाल जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने देश, प्रदेश और समाज की सुख-समृद्धि, शांति तथा प्रगति की कामना की।
पूजा के बाद देवनानी ने जो बात कही, वह हर भारतीय के दिल को छू जाने वाली थी। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की अमर प्रतीक है। सिंधु के पावन तट पर श्रद्धा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का जो संगम दिखता है, वह भारत की सनातन परंपरा का सशक्त परिचायक है।
बता दें कि सिंधु दर्शन यात्रा अपने 30वें वर्ष में इस बार प्रथम सिंधु कुंभ के रूप में एक नया अध्याय लिख रही है। 22 से 27 जून तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में देशभर से श्रद्धालु, संत-महात्मा और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। देवनानी ने कहा कि लद्दाख की अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरें और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत वातावरण इस आयोजन को बेहद खास बनाता है।
इसी दौरान निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर श्री देवनानी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व श्रद्धा, संयम, तप एवं आत्मशुद्धि का प्रतीक है और जीवन में अनुशासन व सकारात्मकता का संचार करता है। उन्होंने प्रदेश में सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की।