असम में BJP-NDA की ऐतिहासिक हैट्रिक: हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में प्रचंड जीत, तीसरी बार सरकार तय

असम में BJP-NDA की ऐतिहासिक हैट्रिक: हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में प्रचंड जीत, तीसरी बार सरकार तय

अनन्य सोच। असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी NDA के दबदबे को और मजबूत कर दिया है। हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में NDA ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करते हुए ऐतिहासिक हैट्रिक दर्ज की है। 126 सदस्यीय विधानसभा में BJP ने अकेले 82 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया, जबकि NDA का कुल आंकड़ा 102 तक पहुंच गया।

कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन Asom Sonmilito Morcha इस चुनाव में बुरी तरह पिछड़ गया और मात्र 19-21 सीटों तक सिमट गया। AIUDF को 2 सीटें मिलीं, जबकि AGP और BPF ने 10-10 सीटों पर जीत दर्ज कर NDA की मजबूती में अहम योगदान दिया।

 चुनाव परिणाम का चार्ट

पार्टी / गठबंधन सीटें (2026) वोट शेयर (%) स्थिति
BJP 82 37.81% ???? पूर्ण बहुमत
NDA (कुल) 102 ???? मजबूत सरकार
कांग्रेस गठबंधन 19-21 29.84% ???? कमजोर
AGP 10 ???? सहयोगी
BPF 10 ???? सहयोगी
AIUDF 2 ⚪ सीमित

चुनाव आयोग के अनुसार 9 अप्रैल 2026 को हुए मतदान में 85.38% मतदाताओं ने भाग लिया, जो राज्य में लोकतांत्रिक जागरूकता का संकेत है। 4 मई को हुई मतगणना में दोपहर तक NDA की जीत स्पष्ट हो गई थी।

विकास और नेतृत्व का प्रभाव

इस जीत के पीछे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मजबूत नेतृत्व क्षमता और विकास आधारित राजनीति को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों ने जनता का विश्वास जीता। साथ ही CAA-NRC पर सरकार के स्पष्ट रुख और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया।

हिमंत बिस्वा सरमा ने जलुकबाड़ी सीट से भारी अंतर से जीत दर्ज की। अन्य BJP नेताओं ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया। दूसरी ओर कांग्रेस के गौरव गोगोई को जोरहाट से हार का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री सरमा ने जीत पर कहा, “यह असम की जनता की जीत है। हम राज्य को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में और तेजी से काम करेंगे।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “असम के नए युग की शुरुआत” बताया।

क्षेत्रीय प्रदर्शन

ब्रह्मपुत्र घाटी में NDA का दबदबा कायम रहा, जहां अधिकांश सीटें गठबंधन के खाते में गईं। बोडोलैंड क्षेत्र में BPF और BJP के तालमेल ने शानदार परिणाम दिए। कछार और बाराक घाटी में कांग्रेस और AIUDF के बीच मुकाबला रहा, लेकिन NDA ने यहां भी सेंध लगाई। चाय बागान क्षेत्रों में मजदूर वर्ग का समर्थन NDA को मजबूती देता नजर आया।

विपक्ष की कमजोरी

विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की आंतरिक कलह और विपक्षी दलों के बीच तालमेल की कमी ने NDA को बड़ा फायदा पहुंचाया। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल अपनी सीट जीतने में सफल रहे, लेकिन पार्टी का प्रभाव सीमित रहा।

आगे की चुनौतियां

तीसरी बार सत्ता में लौट रही NDA सरकार के सामने अब कई अहम चुनौतियां हैं। बाढ़ प्रबंधन का स्थायी समाधान, बेरोजगारी कम करना, चाय उद्योग को आधुनिक बनाना और सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास प्रमुख मुद्दे होंगे। साथ ही सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता होगी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत BJP को पूरे पूर्वोत्तर भारत में और मजबूत बनाएगी। कांग्रेस अब विपक्ष में बैठकर सरकार की नीतियों पर नजर रखेगी।

असम के इस चुनावी परिणाम ने साफ कर दिया है कि राज्य का मतदाता विकास, स्थिरता और मजबूत नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है। BJP-NDA की यह हैट्रिक राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है।