जब Kamaycha और Violin ने छेड़ा सुरों का जादू
जयपुर के RIC में आयोजित ‘Raag–Mad’ ने संगीत प्रेमियों को एक ऐसी अनूठी यात्रा पर ले गया, जहां Folk Music और Classical Music के सुर एक-दूसरे में घुलते नजर आए। यह सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की साझा विरासत का जीवंत उत्सव बन गई।
अनन्य सोच। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जयपुर में आयोजित विशेष सांगीतिक प्रस्तुति ‘Raag–Mad’ ने दर्शकों को लोक और शास्त्रीय संगीत के अद्भुत संगम से रूबरू कराया। Sandeep Ratnu द्वारा संकल्पित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारतीय संगीत की विविध परंपराएं अलग-अलग रास्तों पर नहीं, बल्कि एक ही सांस्कृतिक धारा में प्रवाहित होती हैं।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसे पारंपरिक Fusion Concert की तरह नहीं, बल्कि एक सांगीतिक संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया। मंच पर लोक परंपराओं की सहजता और शास्त्रीय संगीत की गहराई ने ऐसा वातावरण बनाया, जिसने श्रोताओं को शुरुआत से अंत तक बांधे रखा।
शाम का सबसे यादगार पल तब आया जब Rafiq Khan के Kamaycha और Dr. Sakshi Sharma के Violin ने सुरों का ऐसा संवाद रचा, जिसने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों वाद्यों की जुगलबंदी ने यह साबित कर दिया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती।
लोक मंडली में Talab Khan Barna और Dare Khan ने अपनी सशक्त गायकी से राजस्थान की लोक संस्कृति को जीवंत किया। वहीं प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक Ullas Purohit ने रागदारी संगीत की गहराई और भावनात्मक सौंदर्य को मंच पर साकार किया।
ताल पक्ष में Latif Khan Hamira (ढोलक), Zakir Khan Hamira (खड़ताल), Dinesh Khinchi (तबला) और Kailash Solanki (नगाड़ा) ने अपनी लयकारी से प्रस्तुति को नई ऊर्जा दी। Kuldeep ने हारमोनियम पर शानदार संगत कर पूरे कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया।
दर्शकों ने कार्यक्रम की मौलिक अवधारणा और कलाकारों की प्रस्तुति की खुलकर सराहना की। ‘Raag–Mad’ ने एक बार फिर साबित किया कि Indian Classical Music और Rajasthani Folk Music केवल परंपराएं नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना की जीवंत अभिव्यक्तियां हैं। यही कारण है कि यह प्रस्तुति जयपुर के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक यादगार अध्याय बन गई।